
गुजरात चुनाव: भाजपा आवै छै :: कांग्रेस जावै छै :
🌈🌈 मांडलगढ़ [ दिलीप मेहता ]..✍🏻 भारतीय राजनीति में गुजरात व हिमाचल के विधानसभा चुनावो में शुरूवाती दौर के टक्कर में आने के बाद धिरे धिरे कांग्रेस की हवा निकलती दिखाई दी और सरकार बनाने के मंसुबो पर बुरी तरह से पानी फिर गया ? नारे भी गुंजने लगे कि…. भाजपा आवै छै : कांग्रेस जावै छै ….
कांग्रेस ने गुजरात में शालीनता पूर्वक चुनाव लडा और अशोक जी गहलोत की मेहनत रंग जरूर लाई लेकिन माननीय मणीशंकर अय्यर जी के बेतुके बोल के बाद जिस ढंग से नरेन्द्र भाई मोदी ने जो चुनावी हमला बोला उससे कांग्रेस की छवि जनमानस में गिरती गई जिसका फायदा भाजपा ने बखुबी उठा कर स्थिति को अपने पक्ष में भुना लिया । हिमाचल में भी भाजपा ने वापसी कर अपनी ताकत और बादशाहत बरकरार रखी है ।
पुरानी मान्यताओ में हिंदू परम्परा के रिती रिवाजो के अनुसार मलमास में कोई शुभ कार्य नहीं होते है और इसी कडी में राहुल जी गांधी ने 16 दिसम्बर को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला है । कहावत है कि” सिर मुंडाते ही ओले गिरे ” और ऐसा ही लग रहा है कि मलमास में पदभार संभाला फिर चुनाव परिणाम में हार देखने को मिली क्या यह मलमास का प्रभावी नतीजा तो नहीं ?? गुजरात में भाजपा समर्थको ने नारे लगाने शुरू किये है कि ” भाजपा आवै छे : कांग्रेस जावै छे ” अर्थात भाजपा आ रही है और कांग्रेस जा रही है।
इन नारो का जोश आने वाले समय में राजस्थान सहित 4-5 स्टेटो के आगामी विधानसभा चुनावो में भी व्यापक असर डालेगा। अब आनेवाले चुनावी राज्यो में भाजपा और मुखर होकर दिखाई देगी । पहली बार राहुल जीने कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार मलमास में संभाला और संभालते ही हार मिलना …इससे यही नजर आ रहा है कि ऐसा कांग्रेस के लिये अहितकारी साबित हुवा है ।
मलमास का असर किस पार्टी पर भारी रहा है यह देश की जनता के सामने है । कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में टक्कर जरूर दी है । माननीय मणिशंकर अय्यर व कपिल सिब्बल के बयान भारी रहे या मलमास में राहुल जी का अध्यक्ष बनना । इस पर विचार और मंथन की जरूरत कांग्रेस पार्टी करेगी या नहीं … लगता है यह समय व किस्मत का फेर है …..बाकी ,,,मलमास भारी रहा या अय्यर जी व सिब्बल जी के बेतुकेे बोल …यह राम ही जाने ?? 🤷♀🤷🏼♂




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