
कोरोना संकट में आर्थिक चिंतन
( बिहार के चर्चित अर्थशास्त्री व एम सिविल सर्विसेज के अर्थशास्त्र के फैकेल्टी शशि कुमार सिंह की कलम से)
पटना(अनूप नारायण सिंह) :
कोरोना संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे परिवर्तन पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री शशि कुमार सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए है.
कोरोना वायरस और भारतीय अर्थव्यवस्था कोरोना वायरस एक ऐसी महामारी है जो संक्रमण से फैलती है इस बीमारी के लक्षण बताए गए हैं खांसी बुखार सांस लेने में तकलीफ लगभग सभी लोग जानते हैं संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कोई भी आता है तो उसे भी या बीमारी हो जाती है डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति जिस चीज को छू देता है तो परेशानी बढ़ सकती है बार-बार बताया जा रहा है कि इससे बचने के लिए समाज को बचाने के लिए बार-बार हाथ धोएं चेहरे को छूने से बच्चे एक-दूसरे से दूरी बना कर रहे हैं घरों से बाहर नहीं निकले यह एक प्राकृतिक आपदा है आपदा एक प्रकृति या मानव निर्मित जोखिम का प्रभाव है मानव ने प्रकृति के साथ काफी छेड़छाड़ किया है जिसका परिणाम मानव को ही भुगतना पड़ रहा है मानवता को ने पर्यावरण के नकारात्मक रूप को प्रभावित किया है आपदा शब्द ज्योतिष शास्त्र से आया है जिसके अर्थ होते हैं जब सारे बुरी स्थिति में होते हैं तब कोई न कोई बुरी घटनाएं घटती हैं जब प्रकृति अपना विकराल रूप में आ जाती है तो पूरे विश्व में भारी तबाही मचती है कभी-कभी आपदा देश तक ही सीमित रह जाती है और कभी-कभी आप प्रकृति काफी भयानक रूप लेती है तो पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लेती है 2020 में अपने चपेट में ले लिया है एक चीज बड़ी है कि इतिहास को देखा जाए तो प्रत्येक 100 वर्ष में कोई न कोई महामारी आती है जिसके चपेट में आ जाता है 1720 में दुनिया में एक महामारी आई थी प्ले पूरी दुनिया में लगभग 1 लोगों की मौत हुई थी इसका असर 2 वर्ष तक रहा था इसकी शुरुआत फ्रांस के शहर महिला से हुई थी इससे भारत भी अच्छी तरह परिचित है धीरे-धीरे पूरे यूरोप को अपने चपेट में इस महामारी ने ले लिया था उसके बाद उसके पूर्व 1347 से 1351 तक 4 वर्षों तक का प्रकोप था पूरी दुनिया में 4 वर्षों में तीन करोड़ लोग मर गए थे इतनी तेजी से फैला था जब तक लोग समझते तब तक मौत हो जाती थी चूहों से फैला था उन्नीसवीं शताब्दी में 1820 में एशियाई देशों में 1 लोगों की मौत हुई थी और भी तबाही मचाई थी जापान भारत अरब बैंकॉक मनीला जावा मॉरीशस आदि देशों में जबरदस्त है या फैला था सिर्फ जावा में 100000 लोगों की जान गई थी इसके बाद थाईलैंड इंडोनेशिया में सबसे ज्यादा मौत हुई थी फिर 100 वर्ष बाद 1918 1920 के बीच स्पेनिश फ्लू ने कहा मचाया था जिसमें 50 करोड लोग प्रभावित हुए थे जिसमें 5 करोड लोगों की मौत हो गई थी आज 2020 में करो ना पूरी दुनिया में कहर बरसा रहा है एक जानकारी के अनुसार इसकी शुरुआत दिसंबर 1999 के पहले सप्ताह में ब्रांच इन में हुई है जहां वहां के कई बड़े लोग अचानक बुखार से पीड़ित हो जाते हैं दिसंबर के आखिरी सप्ताह में वहां को समझ में आ गया था कि यह एक जानलेवा वायरस है उन्होंने कई और कई लोगों को इसकी जानकारी दी जनवरी 2020 शुरू हो गया पूरी दुनिया में फैल चुकी है 1978 में लिखी गई पुस्तक एस्से ऑफ प्रिंसिपल ऑफ पॉपुलेशन में मालिक ने लिखा है कि यदि मानव स्वयं अपने विवेक से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित नहीं करता है तो बीमारी महामारी युद्ध जैसे प्राकृतिक आपदा अधिक जनसंख्या नष्ट कर सकते हैं एक बार पुनः यह बात सत्य प्रतीत होती दिख रही है चर्च की बात है कि विनाश के लिए प्रकृति को चुनती है विश्व के सक्षम देशों में अर्थव्यवस्था का विशेष ध्यान देना का प्रयास किया लोगों की जान की परवाह नहीं की गई वहां समय से लोग दान नहीं किया गया हजारों लोगों की मौत हो गई अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत समय से जीविका की अपेक्षा जीवन को महत्व देते हुए लोग डाउन कर दिया यदि ऐसा नहीं होता तो शायद अन्य विकसित देशों की तरह भारत में लाखों लोगों की मौत हो जाती क्योंकि चीन के बाद जनसंख्या के दृष्टिकोण से भारत सबसे बड़ा देश है ऐसे में देश के प्रधानमंत्री के द्वारा उठाया गया कदम काफी सराहनीय है पूरी दुनिया में छा चुकी है तो वर्तमान परिस्थिति के स्वभाविक व्यवस्था भी चरमरा चुकी है ऐसी स्थिति में सरकार को दोष देना उचित नहीं हमारी सरकार का पहला उद्देश्य है जीवन को बचाने यदि जीवन बच गया तो जीविका भी कहीं न कहीं सुरक्षित है सारे उद्योग धंधे बंद है सरकार के लिए बड़ी चुनौती है जीवन की रक्षा करते हुए जीविका की भी रक्षा प्रभाव पर ज्यादा ध्यान न देते हुए नकारात्मक चीजों को दूर किया जा चुके हर क्षेत्र में दिख रहा है बस आवश्यकता है जीवन और जीविका दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का सामाजिक वर्ग को हम तीन भागों में बांट सकते हैं निम्न आय वर्ग वाले इस श्रेणी में रख सकते हैं मध्यम आय वर्ग वाले और उच्च आय वर्ग वाले गरीब को तो सरकार मदद कर रही है और करना भी चाहिए लेकिन मध्यम वर्ग के बारे में सरकार लेकिन मध्यम वर्ग के बारे में सरकार ज्यादा गंभीर नहीं हैं ऐसे में मध्यम वर्ग तो कहीं का नहीं है ना तो सरकार द्वारा मदद मिलती है ना खुद सक्षम है और नहीं बता सकते हैं ऐसे में खुद संघर्ष करता दिख रहा है 500000 तक की आवश्यक है किंतु ऐसे लोग हैं जो सरकार की नजर में रिटर्न फाइल कर वर्तमान में उनकी आय पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है हमारे देश में एक और जिंदगी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है दूसरे में करुणा के प्रभाव से इतने वाले अर्थव्यवस्था के कारण बड़े जिंदगी यों और भी संकट में ना पड़ जाए इसके लिए भी सरकार रिजर्व बैंक के साथ-साथ बड़े पूंजीपतियों को भी प्रयास करना चाहिए सम्मलित सहयोग के द्वारा कई प्रयास किए जाने चाहिए वर्तमान परिस्थितियों में लोगों को क्रिया क्रश शक्ति काफी कमजोर होती जा रही है यदि रुपए की कमी हो तो नए नोटों का निर्गमन किया जाना चाहिए . गरीब वर्ग के हाथों में बिना चिंता की एबीवीपी के माध्यम से पैसा भरना चाहिए सरकार ऐसा कर भी रही है इस दिशा में मध्यम वर्ग को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वह अपनी व्यवस्था किसी को नहीं कह सकता छोटे और मध्यम उद्योगों के भी न्यूनतम ब्याज दर लोन देना चाहिए ऐसी स्थिति आए तो यह माई के माध्यम से वापस लेना चाहिए कितने बड़े लोगों को लोन लेकर भागकृषि और सेवा के क्षेत्र विकास दर को अवश्य बढ़ाएंगे कृषकों को खेती करने के लिए अभी बिना ब्याज का लोन देना चाहिए कृषि अर्थव्यवस्था को ठीक रखा जा सकता है इसे सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम का पालन आसानी से हो जाएगा छोटे छोटे व्यापारियों का व्यवसाय चलाने उद्योग चलाने के लिए बिजली बिल चार्ज में छूट चाहिए ताकि उनका मनोबल बढ़ सके शराब बनाने वाले कंपनियों को अभी सैनिटाइजर बनाने का आदेश दिया जाना चाहिए वर्तमान जरूरत को पूरा किया जा सके किसान मजदूर को रोजगार बढ़ाने के लिए निवेश बढ़ाने पर बल दिया जाना चाहिए बैंकों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए सरकना हर फूल जैसे निर्माण कार्य में निवेश करने से मजदूरों को क्रय शक्ति बढ़ेगी इन सब बातों पर बल देने से सामाजिक दूरी का नियम का पालन करते हुए बाजार में तरलता बनी रहेगी ताकि अर्थव्यवस्था रूपी बाजार का चक्का घूमता रहे




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