
कॉलेज में छत ढलाई में अनियमितता के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन
बनियापुर(सारण)।प्रखण्ड के लोक महा विद्यालय में अनियमितता का आरोप लगाते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया एवम छत ढलाई रुकवा दिया।
जहां काम का विरोध करने वाले ग्रामीण तथा छात्रों में सुभाष कुमार, अभय साह, मुकेश राय, अजय दुबे, विकाश दुबे, राजकुमार राय, कांतू ठाकुर सहित दर्जनों छात्र अभिभावकों का आरोप था कि छव माह पहले का सरिया का लगाया जा रहा है। और घटिया सीमेंट से छात्रावास को ढला जा रहा है। जहां लोगों का यह भी आरोप था कि इसकी सूचना अनुमंडल पदाधिकारी सदर छपरा के पास आवेदन देने के बाद भी एमएलसी सच्चितानंद राय का टीम ग्रामीणों के विरोध पर पहुंच कर हडपझड करने लगी। उसके बावजूद महाविद्यालय परिसर में उपस्थिति प्रभारी प्रचार्य डॉक्टर राजकुमार सिन्हा देखने भी नहीं गए। ग्रामीण अभय कुमार गुप्ता ने बताया कि 6 माह पूर्व में बाधा सरिया पूर्ण रूप से जंग लग चुकी है। इसे हटा कर नया सरिया लगाकर भवन की ढलाई की जाए। तो वही छात्र प्रिंस कुमार का कहना है कि यह भवन यूजीसी के द्वार बालिका आवास के लिये आवंटित किया गया है। जिसमें शाशिनिकाय के द्वारा घटिया समान से भवन का निर्माण कराया जा रहा है। और घटिया छर और सीमेंट से इसका ढलाई किया जा रही है। ग्रामीण मुकेश राय ने बताया कि बालिका आवास का निर्माण घटिया सामग्री से इस लिये करवाया जा रहा है कि ग्रामीणों के गरीब बच्चे, असहाय के बच्चे क्षेत्र में पढ़ने आते है। इस लिए यहां लूट मची है। ओहदे के अनुसार कोई पुछने वाला नहीं है। हंगामा करने वाले ग्रामीणों ने बताया कि जब तक इस कार्य कि गंभीरता पूर्वक जांच नहीं हो जा रही तब तक कार्य नहीं होने दिया जाएगा। लोगों ने कहा सरकारी काम के स्टिमेट की सूचना पट्ट भी लगाई गई है। लेकिन यहां आज तक सूचना पट्ट तक नहीं लगई गई है। हालांकि कार्य वाधित होने के बाद दो पक्षों में जमकर हडपझड भी हुई। जिसमें लोगों का आरोप था कि दूसरा पक्ष एमएलसी की थी। जिनके सहयोग से कार्य कराया जा रहा है। जहां दर्जनों ग्रामीण उपस्थित थे। इस मौके सूभास राय, मनीष राय, रवि राय, अजय राय, पण्डित राय, राजकुमार राय, दीपू राय, अमरेन्द्र दुबे, विकाश दुबे, अभिमन्यु दुबे, कानतू ठाकुर वशिष्ठ ठाकुर, टुनटुन ठाकुर, अवधेश ठाकुर, भुखन राय, महेंद्र ठाकुर, अजित साह, महावीर साह, रविशंकर साह, योगेंद्र साह, पशुराम साह, टनटन साह आदि लोग मौजूद थे।




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