
किसान राकेश यादव जीवामृत विधि (गाय के मल मूत्र बेशन व गुड़) का प्रयोग कर कई गुना ज्यादा उत्पादन कर रहे है।
✍”दैनिक खोज खबर” ऑन-लाईन हिन्दी न्यूज वेबपोर्टल के लिए बीघापुर उन्नाव (उ.प्र) से जितेंद यादव की रिपोर्ट:– एक ओर अंधाधुन्ध रासायनिक खादों का प्रयोग कर के किसान फसलों को उपज रहे है वही इसके विपरीत ग्राम गया बक्सखेड़ा (बारा) के किसान राकेश यादव जीवामृत विधि (गाय के मल मूत्र बेशन व गुड़ से) बगैर रासायनिक खाद का प्रयोक किये उससे कई गुना ज्यादा उत्पादन कर रहे है।

जो कि स्वस्थ की दृष्टि से भी फायदेमंद व टिकाऊ होती है उन्होंने अभी हल्दी की खेती कि है और वो बताते की उन्हों ने 1 बिशुवा जमीन में 3 क्विंटल के हिसाब से हल्दी का उत्पादन किया है क्षेत्रीय लोगो के लिए एक मिशाल बनते जा रहे है ये किशान क्योकि जँहा एक ओर आवारा गाओवंशीय पशुओं से किसान परेशान है।
क्योंकि वो उनकी फसल बर्बाद कर रहे है तो वंही राकेश यादव ने उनके मल मूत्र की मदद से ऐसी खेती कर रहे है जिसमें पैदावार तो दोगुनी से जयसद है ही साथ ही लागत भी न के बराबर है। क्षेत्रीय किसान बोधसिंह यादव, शिवब हादुर यादव रघुनाथ, कृपा शंकर नरेश आदि ने भी उनके इस तरीके को अपनाना चालू कर दिया है




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