
कागजों में दफन हुआ शिक्षा का अधिकार
ब्रजेश कुमार यादव
पतरघट/सहरसा :
पतरघट प्रखंड क्षेत्र में निजी विद्यालयों का मंशा सिर्फ धन संग्रह करने की धंधा बन गई है ।एडिमीशन फीस रिएडमिशन, डेवलपमेंट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, टूर, खेलकुद, वाहन आदि के नाम पर मनमाने ढंग से शुल्क लिए जाते हैं ।
इसके बाद भारी भरकम मुल्य के काॅपी और किताब स्कुल से ही खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है जिसमें स्कुल प्रबंधक काफी मुनाफा कमाते है । जबकि गरीब छात्रों को निशुल्क शिक्षा का प्रावधान हैं, इसका भी पालन नहीं हो रहा है ।इससे गरीब छात्र आज भी वंचित है कुछ सालों में यहाँ निजी विद्यालय कुकरमुत्तो की तरह खुल रहे हैं । अगर कोई गरीब साहस करके इन निजी विद्यालयों में अपने बच्चों को एडमिशन करवाते हैं तो हालत यह हो जाती है कि एक साल के अन्दर शुल्क नहीं देने पर बच्चे का नाम काट दिया जाता है ।ऐसे में सवाल उठता है कि संवेदनहीन निजी विद्यालयों की मनमानी पर रोक कौन लगाऐगा।




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