•आज इस देश को व्हाइट कलर जॉब्स वालों की जरूरत नहीं बल्कि जरूरत है………?
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✍अतिथि संपादक नवीन सिंह परमार जी की क़लम से…आज इस देश को White Colour जाॅब वालों की नहीं बल्कि जरूरत है सिवान शहर में चाय बेचने वाले भोला जी, रघुनाथपुर बजार में सब्जी बेचने वाले सुरेन्द्र प्रसाद व भूजा का ठेला लगाने वाले शिवजी प्रसाद जैसे लोगों की.
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🌐कुछ दिन पूर्व प्रधानमंत्री जी ने एक साक्षात्कार में कहां की पकौड़ा बेचना भी एक रोजगार है:प्रधानमंत्री के इस साक्षात्कार के बाद सोशल मीडिया पर कुछ White Colour बुद्धिजीवी , डिजाइनर पत्रकार व कुछ विपक्ष के नेताओं के प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाया जा रहा है।
•यहा बता दे की देश हम White Colour जाॅब करने वालों से आगे नहीं बढ़ता बल्की आगे बढ़ता है मेहनतकश उद्योगपति धीरूभाई अम्बानी, सीवान शहर में चाय बेचने वाले भोला जी व रघुनाथपुर बजार में सब्जी बेचने वाले सुरेन्द्र प्रसाद व भूजा का ढेला लगाने वाले शिवजी प्रसाद जैसे लोगों से।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाया वाले लोगों के नजर में पकौड़ा बेचना छोटा काम है। लेकिन शायद उन्हे पता नहीं मेहनत से किया गया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। वर्तमान में देश के कई कई अरबपति,अरबपति बनने से पहले यही काम करते थे।
हम टनाटन कपड़े पहन के ID कार्ड की माला लटकाए आफिस से बाहर निकल कर जिस पकौड़े, मैग्गी, ऑमलेट या कुलचे के ठेले पर कभी कभी खा लेते है और चाय पी लेते है अपने white collar जॉब के आगे उसको तुच्छ समझते हैं। शायद हमें पता नहीं कि यही मेहनतकश लोग भविष्य में 3-5 सितारे के होटल का खोल सकता है ….. फिर आपकी जेब उसके उस होटेल के अंदर कदम रखने का साहस नहीं करने देगी ….
ऐसे उदाहरण देश के चेन्नई – बैंगलोर – हैदराबाद – पुणे अहमदाबाद से लेकर शिमला तक अनेकों मिल जांएगे। यही नहीं सीवान व रघुनाथपुर जैसे ग्रामीण अंचल में भी मेहनतकश को पूंजीपति व उद्योगपति बनने की उदाहरण मिल सकते है।
• बाकी आप पकौड़े चाय के ठेले लगाने वाले को छोटा काम करने वाला समझ सकते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि
ऑनेस्ट नाम की रेस्टोरेंट चेन जो भारत में 800 और विदेशों में 50 रेस्टोरेंट चलाती है उसके मालिक महेश चंद्र गुप्ता मात्र 30 साल पहले अहमदाबाद के लाभ गार्डन के सामने एक ठेले पर भाजी पाव बेचा करते थे। पश्चिम भारत में आपको जगह-जगह TGB यानी द ग्रैंड भगवती के नाम से फाइव स्टार होटल और रेस्टोरेंट मिलेंगे इसके मालिक भी अहमदाबाद के एस जी रोड पर कभी ठेले पर चाय बेचा करते थे।
भारत की प्रसिद्ध रेस्टोरेंट चेन शुद्धता और संदीपा जिसके कुल 600 रेस्टोरेंट है उसकी मालकिन पैट्रिशिया नारायण अपने पति के मौत के बाद मरीना बीच पर काफी बेचा करती थी और उनके पहले दिन की कमाई मात्र 20 पैसे थी।
दिल्ली मुंबई और गुड़गांव में साउथ इंडियन रेस्टोरेंट की श्रृंखला सागर रत्ना में खाते हैं। आप यह जानकर चौक जाएंगे कि इसके मालिक जयराम बनान कभी गरीबी से तंग आकर उडुपी कर्नाटक से घर से भागकर दिल्ली गए थे और एक रेस्टोरेंट में बर्तन धोने का काम किया फिर उसी रेस्टोरेंट के बाहर चाय बेचने का काम किया और आज 400 रेस्टोरेंट के मालिक है और साथ ही संसद भवन की कैंटीन भी चलाते हैं।
मेरा मानना है कि जिस दिन किसी बेरोजगार ने चाय की भट्टी या पकौड़े का दुकान किसी कोने में डाल दी उस दिन उसने अपने 5 सितारे होटल के नींव का पहला पत्थर रख दिया, ऐसा होना कोई किस्सागोई नहीं है ….
मैं 2001 से पत्रकारिता कर रहा हूँ, समाज के नजर में यह White Colour जाॅब है। मैने अपने आसपास ऐसे अनेक लोगों को देखा है कि जो कभी किसी इंडस्ट्रियल एरिया या रघुनाथपुर, आंदर व सीवान जैसे छोटे बाजारों में मैग्गी, ऑमलेट, कुलचा छोला व सब्जी का ठेला लगाते थे, आज वे शानदार घर व चार चक्के वाले लक्जरी गाड़ी के मालिक है।
मै और मेरे जैसे White Colour जाॅब करने वाले दर्जनों लोग आज भी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे है और शायद यही करते हुए हमारी जिंदगी भी खत्म हो जाएगी, क्योंकि हमने किसी चाय वाले किसी पकौड़े वाले किसी ठेले वाले आदि को हेय दृष्टि से देखना सीखा है हमने उसके अंदर उधमी को नहीं पहचाना।
हम White Colour जाॅब करने वाले शायद पकौड़े , चाय व सब्जी के ठेले लगाने वाले इन मेहनतकश लोगों की मेहनत को समझ ही नहीं पाते है की मेहनत और ईमानदारी से किया जाने वाला कोई भी काम छोटा नहीं होता, आपकी मेहनत और ईमानदारी आपको बुलंदियों पर पहुंचाती है।
देश हम White Colour जाॅब करने वालों से आगे नहीं बढ़ता है।वह आगे बढ़ता है मेहनतकश उद्योगपति धीरूभाई अम्बानी , सीवान शहर में चाय बेचने वाले भोला जी व रघुनाथपुर बजार में सब्जी बेचने वाले सुरेन्द्र प्रसाद व भूजा का ठेला लगाने वाले शिवजी प्रसाद जैसे लोगों से।
आज इस देश को White Colour जाॅब वालों की नही बल्कि जरूरत है सीवान के भोला जी चाय वाले, रघुनाथपुर के सुरेन्द्र जी सब्जी वाले और शिवजी प्रसाद भुजा वाले की।




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