•राकेश सिंह यादव ने कर दिया कमाल “जीवामृत विधि” से खेती कर किया रिकार्ड तोड़ फ़सल उत्पादन
“जीवामृत विधि” से खेती करके महज 1 बिसुआ भूमि से रिकार्ड 3 कुंतल हल्दी व 1 एकड़  जमीन में 6 कुंटल मूँग का उत्पादन कर दिखाया।

✍जितेंद्र यादव बीघापुर उन्नाव की स्पेशल रिपोर्ट जँहा एक ओर अंधाधुन्ध रासायनिक खादों का प्रयोग करने के बाद भी किसान फसलों से अपेक्षित लाभ नहीं ले पा रहे हैं वहीं इसके विपरीत बिना रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किये ही  ग्राम गयाबक्स खेड़ा, बारा के एक किसान राकेश सिंह यादव द्वारा जिन्होने डॉ भीम राव अम्बेडकर विश्व विद्यालय लखनऊ से 5 दिवसीय प्रशिक्षिण कर श्री सुभाष पालेकर द्वारा विकसित की गई  “जीवामृत विधि” (गाय के मल मूत्र, बेशन व गुड़ ) से खेती करके महज 1 बिसुआ भूमि से रिकार्ड 3 कुंतल हल्दी का उत्पादन व 1 एकड़  जमीन में 6 कुंटल मूँग का उत्पादन कर दिखाया।

जो कि सामान्य उत्पादन से 2 गुना से भी आधिक है किसान राकेश द्वारा किये गए इस आश्चर्य जनक उत्पादन से प्रभावित होकर आस-पास के गांवों के किसान मिथिलेश चन्द्र सिंह रग्घूखेड़ा, ओमकार सिंह बारा, विभूति प्रसाद सिंह कमलीखेड़ा, राजीव शुक्ला टेढ़ा, कृपाशंकर, बोधा सिंह, शिवबहादुर यादव कल्लू यादव रुद्रपुर आदि दर्जनों किसानों ने, किसान राकेश सिंह से सीखकर जीवामृत बिधि से खेती करनी सुरू की है और कुछ किसान अभी भी उनसे ये बिधि सीखने के लिए आते है।

राकेश सन 2001 से खेती कर रहे है उनके पास  कुल 5 एकड़ जमीन है वे हमेशा ही नई व वैग्यानिक  विधि से खेती करने की कोशिश करते रहे है उन्होंने बताया कि हल्दी व मूंग का इतना आधिक उत्पादन उर्वर डालने के बाद भी कभी नही हुआ है जितना इस विधि से बगैर उर्वकों का प्रयोग किये ही हो गया ।
अब वह रासायनिक उर्वरकों का बिल्कुल भी प्रयोग अपनी खेती में नही करते है । इस बार उन्होंने अपने खेतों में आलू, गेंहू, अरहर, व सरस्हाओ की भी खेती इसी विधि से की है तथा उर्वरको से पूर्णतया किनारा कर लिया। तथा फसलों में लगने वाले रोगों का भी उपचार की दस्परणी बिधि भी इसी पे आधारित है उसी से हो जाता है  और बताते है कि इस बिधि से उत्पादित फसलें व फल भी उत्तम किस्म की होते है तथा

फसल में रोग लगने की दसा में कीटनाशक के रूप में दस्परणी विधि से 200 लीटर पानी मे 20 लीटर गो मूत्र, गे का गोबर, नीम की पत्ती, कंज बेल तुलसी धतूरा मदार,अनार, सलीफ हल्दी आदि के 2,2 किलो पत्ते 1 किलो तम्बाखू, 1 किलो पिसी मिर्च,500 ग्राम हल्दी पाउडर, 500 ग्राम अदरख की चटनी,500 ग्राम लहसुन,10 ग्राम हींग सभी को मिलाकर 40 दिन तक एक ड्रम में भर कर रख दो था तथा सुबाष संम एक डंडे से हिलाते रो 40 दिन बाद इसको छन्नी से छान कर पानी के साथ या छिड़कने वालय मशीन से छिड़कने के लिए आपका कीटनाशक तैयार हो जाएगा  जो किसी भी रोग के रोकथाम के लिए कारगर होगा

कृषि तकनीकी सहायक ब्लाक बिघापुर कुलदीप सिंह से इस बिधि के बारे में हमने जब जानकरी करने की कोशिश की तो उनका फोन नही उठा ।