सऊदी, अफगानिस्तान को आतंकवादियों का गढ़ बनाने की चेष्टा में हैं
वलीद बिन तलाल ने अफगानिस्तान में पूंजीनिवेश हेतु इच्छा जताई है। सऊदी अधिकारियों द्वारा अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में एक तथाकथित इस्लामी विश्व विद्यालय के निर्माण के प्रयास के बाद वहाबियों के प्रभाव को इस देश में बढ़ाने के लक्ष्य से अब सऊदी युवराजों ने पूंजी निवेश के बहाने अफगानिस्तान को लक्ष्य बनाया है।
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति के आधार पर सऊदी अरब के एक प्रसिद्ध पूंजीपति युवराज वलीद बिन तलाल ने काबुल की यात्रा की और वहां पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ ग़नी से भेंटवार्ता की है। इस भेंट में वलीद बिन तलाल ने अफगानिस्तान में पूंजीनिवेश हेतु इच्छा जताई है।
कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान में वलीद बिन तलाल के साथ दूसरे कई विदेशी कंपनियों के मालिक भी इस समय पूंजीनिवेश के लिए अफगानिस्तान में मौजूद हैं और यह वह विषय है जिसने अफगानिस्तान के संदर्भ में सऊदी अधिकारियों के लक्ष्यों के बारे में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हल्कों के ध्यान को आकर्षित कर रखा है।
अफगानिस्तान में अशांति व असुरक्षा के जारी रहने को ध्यान में रखते हुए बहुत कठिन प्रतीत हो रहा है कि सऊदी युवराज ने पूंजी निवेश के लिए अफगानिस्तान की यात्रा की हो क्योंकि सुरक्षा के जारी रहने के साथ अफगानिस्तान में पूंजी निवेश बहुत कठिन है।
अब तक किसी क्षेत्रीय देश में सऊदी अधिकारियों द्वारा पूंजी निवेश के बारे में कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है और मुख्य रूप से वे पाकिस्तान के धार्मिक मदर्सों में वहाबी विचार धारा के प्रचार- प्रसार और साम्प्रदायिक व आतंकवादी गुटों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निवेश करते हैं।
आतंकवादी गुट अलकायेदा का सरगना ओसामा बिन लादेन भी अरब पति सऊदी युवराज था जिसने आतंकवादी हमलों के लिए अफगानिस्तान को अपना गढ़ बन
अल कायेदा का सरगना ओसामा बिन लादेन भी अरब पति सऊदी युवराज था जिसने आतंकवादी हमलों के लिए अफगानिस्तान को अपना गढ़ बना लिया था। हालिया वर्षों में सऊदी अधिकारियों ने दाइश जैसे आतंकवादी गुटों का खुल्लम- खुल्लम समर्थन करके इराक और सीरिया में अनगिनत अपराधिया किये हैं।
इसी तरह सऊदी अधिकारियों ने सीधे रूप से यमन पर हमला किया है और अब तक हज़ारों यमनी मारे जा चुके हैं पंरतु इराक और सीरिया में दाइश को भारी पराजय का सामना है और यमन युद्ध में भी सऊदी अधिकारियों को सफलता नहीं मिली है।
इन बातों के दृष्टिगत सऊदी अधिकारी अब आतंकवादियों को स्थानांतरित करने और उन्हें फिर से संगठित करने के लिए दूसरे ठिकाने की सोच में पड़ गये हैं। सऊदी युवराज वलीद बिन तलाल की अफगान यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।





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