भीलवाड़ा: शहर की सफ़ाई को लेकर कलेक्टर चिंतित, कमिश्नर मस्त
राजनीतिक खेल के चलते सबसे गंदा शहर घोषित हुआ
आज़ाद नेब
भीलवाड़ा 3 मई। पूरे जिले का माई – बाप समझा जाने वाला जिला कलेक्टर बड़ा होता है या शहर की गंदगी को दूर करने वाले महकमें नगर परिषद का आयुक्त बड़ा होता है ? इसको लेकर शहर में इन दिनों जोरदार बहस छिड़ी हुई है। इस मामले को लेकर परदे के पीछे राजनीतिक हस्तियाँ दखल अंदाज़ी कर रहे हैं। जो एक दुसरे के साथ शह मात का खेल खेल रहे हैं।
भीलवाड़ा के तेज तर्रार समझे जाने वाले जिला कलेक्टर श्री महावीर प्रसाद शर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा भीलवाड़ा शहर को राज्य का सबसे गंदा शहर बताया जाने के बाद नगर परिषद आयुक्त पदम सिंह नरूका को भीलवाड़ा से बाहर का रास्ता दिखाने के हर तरह के उपाय किए लेकिन नरुका भीलवाड़ा से हिले भी नहीं करीब 3 सप्ताह पहले राज्य सरकार को इस बारे में एक अनुशंषा भी जिला कलेक्टर कर चुके हैं , फिर भी नरूका को नहीं हटवा पाए। तो क्या सरकार भी नरूको हटाना नही चाहती या किसी अपने को खुश करने के लिए सफ़ाई अभियान की धज्जियां उड़ाने को तैयार है।उल्लेखनीय है कि नरूका अपने तबादले पर अदालत से स्थगन आदेश लिए हुए हैं ।
हद तो तब हो गई जब भीलवाड़ा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर ( शहर) द्वारा नरूका को उनके न्यायालय में पेश होने के आदेश को भी ठेंगा दिखाकर नरूका जयपुर चले गए । अब नरूका को 8 मई को न्यायालय में हाज़िरी देनी है, नरूका आएंगे या नहीं आएंगे इसको लेकर अभी भी संशय बना हुआ है । नरूका के रूकने, जाने के चक्कर में नगर परिषद सभापति को भट्टा बैठ चुके भीलवाड़ा शहर के लिए बहाना मिल चुका है । बात शहर की टूटीफूटी सड़कों की हो , ओडीएफ में पीछे रहने की , रामधाम के पास ओवरब्रिज या सड़ते शहर की । मैडम समदानी की सभी अंगुलियां नरूका की तरफ उठी रहती हैं ।
एक बात फिर भी रह जाती है , जब नरूका यहां रूकते ही नहीं है तो शहर में अवैध निर्माण , गली मोहल्लों में कटले बाजार , माल्स किसकी शह से बन रहे ह़ै ? शहर की प्रथम नागरिक और जिला कलेक्टर भी जब नरूका का पत्ता नहीं हिला सकते ,तो क्या सरकार भी कुछ नही कर सकती। या सरकार की यहीं मन्शा है की भीलवाड़ा शहर पर प्रदेश का सबसे गंदा शहर बना रहे।




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