कार्तिक शुक्ल पंचमी बुधवार 25 अक्टूबर को श्रद्धालु खरना करेंगे। उदयव्यापिनी तिथि बुधवार को है, इसलिए इसी दिन खरना शास्त्रसम्मत है। घरों के अलावा गंगा घाटों पर भी व्रती स्नान करके मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर खरना का प्रसाद गुड़-चावल की खीर और रोटी तैयार करेंगे।
आचार्य बैद्यनाथ झा शास्त्री ने बताया कि व्रती भास्कर भगवान को भोग लगाकर स्वयं भी ग्रहण करेंगे। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला-निराहार व्रत शुरू हो जाएगा।
भगवान भास्कर को सायंकालीन अर्घ्य 26 अक्टूबर की शाम जबकि 27 अक्टूबर की सुबह सूर्य देवता को प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान करने के साथ इस महाअनुष्ठान का समापन होगा। सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्य की प्राप्ति, सौभाग्य व संतान के लिए रखा जाता है। शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से भी महती तादाद में लोग छठ महापर्व करने पटना आएंगे।
भगवान भास्कर को गुरुवार को सायंकालीन अर्घ्य
ज्योतिषाचार्य मार्कण्डेय शारदेय ने पंचांगों के हवाले से बताया कि गुरुवार 26 अक्टूबर की शाम सूर्य भगवान को सायंकालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। ह्रषिकेश पंचांग, विश्वविद्यालय पंचांग, एनसी लाहिड़ी पंचांग और केपी दत्ता पंचांग सभी में गुरुवार की शाम ही अस्ताचलगामी सूर्य को सायंकालीन अर्घ्य शास्त्रसम्मत बताया गया है।
आचार्य प्रियेन्दु प्रियदर्शी के अनुसार षष्ठी तिथि 25 अक्टूबर की सुबह 9.37 बजे से गुरुवार 26 अक्टूबर की दोपहर 12.15 बजे तक है। सूर्य की उपासना सूर्योदय के अनुसार की जाती है।
शुक्रवार 27 अक्टूबर की सुबह उगते सूरज को प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा। 27 अक्टूबर को सुबह 8.27 बजे तक सप्तमी तिथि है।





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