मढ़ौरा – 29 नवंबर, बालियानिवासी विवेकानंद सिंह, जो अन्नू बाबा फाउंडेशन (पिपराकलां, बलिया) के लिए 1192 से 1942 के बीच तक के इतिहास पर शोध कर रहे हैं और सेंटर फॉर हिस्टोरिकल एंड कल्चरल रिसर्च की अध्यक्ष, डॉ अलका सिंह के संपादकत्व में प्रकाशित होनेवाली पुस्तक, जो बहुरिया रामस्वरूप देवी के जीवन पर आधारित है, के लिए काम कर रहे हैं, ने एक टेलीफोनिक साक्षात्कार में बताया कि आज से 71 वर्ष पूर्व, 29 नवंबर, 1953 को ऑल इण्डियन कांग्रेस कमिटी की सदस्य, सारण डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमिटी की डिक्टेटर, बिहार की रानी लक्ष्मीबाई, अमनौर एस्टेट की बहुरिया, वीरांगना रामस्वरूप देवी, जो 1951-52 में हुए, प्रथम बिहार विधानसभा के चुनाव में 74-मढ़ौरा विधानसभा-क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुई थीं, का  निधन हुआ था।

चूंकि 12 मई, 1952 ई. को प्रारम्भ हुए, बिहार विधानसभा का तृतीय-सत्र 09 अक्टूबर, 1953 ई. को समाप्त हो चुका था, लिहाज़ा 01 फ़रवरी, 1954 ई. को प्रारम्भ हुए चतुर्थ-सत्र के प्रथम दिन, तत्कालीन राज्यपाल, हिज़ एक्सीलेन्सी रंगनाथ रामचन्द्र दिवाकर के अभिभाषण के बाद  तत्कालीन अध्यक्ष (द ऑनरेबल बिन्देश्वरी प्रसाद वर्मा, एमएलए, मुज़्ज़फ़रपुर शहर) ने सदन को विधान-सभा की भूतपूर्व सदस्या स्वर्गीया श्रीमती रामस्वरूप देवी, भूतपूर्व सदस्य स्वर्गीय यमुना कार्जी एवम् भूतपूर्व सदस्य मरहूम मुहम्मद नौमान के निधन की सूचना देते हुए कहा कि –

सभा के गत् सत्र के समाप्त होने के बाद हम कुछ ऐसे प्रमुख व्यक्तियों को खो बैठे हैं जिनका उल्लेख करते हुए मुझे दुःख होता है। इस सभा की एक सदस्या श्रीमती रामस्वरूप देवी अकस्मात् गत् २९ नवम्बर को इस असार संसार को छोड़कर चल बसीं। मृत्यु के समय उनकी आयु ६९ वर्ष की थी।

स्वर्गीया रामस्वरूप देवी का जन्म १८८२ ई. में भागलपुर जिले के त्रिमुहान गांव में हुआ था। अपने पति सारन निवासी स्वर्गीय हरिमाधाव सिंह जी के साथ श्रीमती रामस्वरूप देवी ने जिन्हें श्रद्धापूर्वक लोग बहुरिया जी कहा करते थे, राजनीति में भाग लेना प्रारम्भ किया। १९३३ में गया में हुए राजनीतिक सम्मेलन की अध्यक्षता उन्होंने की, जिसके फलस्वरूप तत्कालीन शासन ने उन्हें ६ महीने की कैद की सजा दी। कारावास की अवधि समाप्त होने के उपरान्त उन्होंने देशहित के विभिन्न कार्यों में अपने को लगाया।

१९४२ की क्रांति में उनकी लाखों की सम्पत्ति नष्ट हो गई। स्वतंत्रता-युद्ध में उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। परन्तु प्रत्येक जेल यात्रा से वे नवीन प्रेरणा एवं उत्साह के साथ पुनः अपने कार्य क्षेत्र में प्रविष्ट हो जाती थीं। बिहार की महिलाओं में उन्होंने जागृति और चेतना की जो लहर फैलायी थी, उसका वर्णन बिहार के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में किया जायेगा। यह उनकी निःस्वार्थ सेवा और बलिदान का ही फल था कि वे पिछले चुनाव में इस सदन की सदस्या निर्वाचित हुई थीं।

बहुरिया जी स्नेह, धीर, उदारता, सेवा और त्याग की पुनीत मूर्ति थीं। साथ ही उनमें राष्ट्र-निर्माण के प्रति अदम्य उत्साह था।

मिनिस्टर ऑफ़ फाइनेंस, लेबर, डेवलपमेंट (एग्रीकल्चर) एण्ड मीडियम इरीगेशन द ऑनरेबल डा. अनुग्रह नारायण सिंह (एमएलए, इण्डियन नेशनल कांग्रेस नबीनगर) – अध्यक्ष महोदय, जिन तीन व्यक्तियों के निधन पर शोक
प्रकट करने के लिये खड़ा हुआ हूँ, उनके विषय में दो-चार शब्द कह देना उचित मालूम पड़ता है। स्वर्गीया बहुरिया जी के संबंध में बहुत कहने की आवश्यकता नहीं है। इनको सूबे के सभी लोग अच्छी तरह जानते हैं। इन्होंने और इनके परिवार ने जो देश की सेवा की और उस क्षेत्र के रहने वाली जनता की, वह अच्छी तरह विदित है। उनकी सेवाएं और स्फूर्ति बराबर कामयाब रहीं। १९४२ की लड़ाई में परिवार वालों और उनके साथ कार्य करने वाले लोगों ने ऐसी बहादुरी दिखलाई थी, जो कभी भूली नहीं जा सकती है। अंग्रेजी शासकों द्वारा जो कुछ अत्याचार उस इलाके के लोगों पर हुए थे, उस अत्याचार को सहन करने की शक्ति इलाके के लोगों के सामने बहुरिया जी ने पेश की थी।इतनी ज्यादतियों के होने पर भी बहुरिया जी ने एक मिनट के लिये भी अपने उत्साह को नहीं खोया । १९४२ की चलती लड़ाई में बहुरिया जी बहुत कामयाब रहीं। उसके बाद वे जनता की इतनी प्रिय बन गई, जिसके फलस्वरूप जब वे चुनाव में खड़ी हुईं तो चुन ली गईं। इसलिये ऐसे व्यक्ति के निधन हो जाने पर हमको शोक प्रकट करना उचित ही है। मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि इस सभा की समवेदना उनके परिवार को प्रेषित कर दी जाय।

सिद्धू हेम्ब्रोम (एमएलए, झारखण्ड पार्टी, कोल्हान) – अध्यक्ष महोदय, श्रीमती रामस्वरूप देवी के निधन से हमारे सदन के अन्दर एक सदस्य की कमी पड़ गयी है। उनके निधन के संबंध में जो भार हमारे डिप्टी लीडर ने प्रकट किए हैं वे बिल्कुल सही हैं। इस सभा की सदस्या चुनकर जब वे प्राय तो उनसे मेरा परिचय हुआ। वे इस सभा की बहुत अधिक उम्रवाली सदस्या थीं। उनकी मृत्यु होने के कारण बिहार के नारियों में काम करने की जो स्फूर्ति थी वह मन्द पड़ जायगी। उनके निधन से हमारे सूबे को बड़ी क्षति पहुंची है और उनके परिवार को जो दुख हुआ है, हम उसके साथ है। उनके दुखी परिवार को संवेदना एवं सहानुभूति संदेश इस सदन की ओर से पहुंचायी जाय।