सामाजिक सौहार्द की मिशाल बने सिद्धेश ,रक्तदान से 18 महीने की आफिजा हयात को मिली जीवनदान

मढौरा (सारण)
स्थानीय एक निजी क्लिनिक में थैलेसिमियां जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त एक 18 माह की बच्ची को खून की कमी से जान को खतरा था। परिवार के इस बच्ची के लिए खून का इंतजाम करना मुश्किल पर रहा था I वही मात्र 2.8 प्रतिशत हीमोग्लाबिन के कारण भी बच्चे की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी I बच्ची जन्म से ही थैलेसिमियां नामक एक गंभीर अनुवांशिक बिमारी से ग्रसित थी ।

इस बिमारी के कारण उसके शरीर प्रोटीन का संचय नहीं हो पा रहा था I बच्ची की नाजुक हालत और उसे तत्काल खून की आवश्यकता की जानकारी मिलने पर सिद्धेस कुमार सिंह ने मानवीय संवेदना का परिचय दिया I सिद्धेश किसी कार्य से निजी क्लिनिक पहुंचे थे बच्ची की नाजुक हालत की जानकारी मिलने पर तत्काल खून देने पर हामी भर दी। संयोग से दोनों का रक्त बी-पोजिटिव निकला अौर सिद्देश नवरात्र के पहले दिन मुस्लिम बच्ची को रक्तदान कर बच्ची के लिए फरिश्ता बन गये। वही समाज में लगातर कमजोर होती सामाजिक सौहार्द के लिए स्वयं एक मिशाल बन गए ।

क्लीनिक के चिकित्सक डॉ. विजय कुमार शर्मा बताया गया कि मढ़ौरा के नगर पंचायत के वार्ड तीन के असोइयां निवासी अफजल अली कादरी अौर रुखसाना बेगम की आफिजा पहली पुत्री है । बच्चे को तत्काल खून नहीं मिलने पर जान का खतरा बन गया था । उसके शरीर में हीमोग्लाबिन मात्र 2.8 ग्राम पर पहुच गया था अौर बच्ची ल्यूकिमियां से भी प्रभावित हो गयी थी I डाक्टर ने बताया कि सिद्धेस कुमार सिंह ने रक्तदान कर सामाजिक सौहार्द की मिशाल पेश की है । डॉक्टर के अनुसार आफिजा गंभीर अनुवांशिक रोग थैलेसिमियां से ग्रसित है I जीवन बचाने के लिए आफिजा को बार बार खून की जरुरत होगी I बच्ची की स्थिति को को जान परिजन में भी गंभीर चिंता है I परिजन को बार बार खून नही मिलने पर आफिजा को खो देने का गम सता रहा है Iआपको बता दे की मढौरा के स्व.डॉ.एन .के .सिंह के पुत्र सिद्धेश कुमार सिंह ऐसे जुरूरत मदों के जीवन में पहले भी फरिश्ते बन के रक्तदान कर चुके है । फिर ऐसा कर समाज मे मिशाल बनते जा रहे है ।




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