
डोरीगंज (सारण)।गंगा और सरयू नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने सारण जिले के तटीय एवं दियारा क्षेत्रों के लोगों की नींद उड़ा दी है। नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ के साथ-साथ भीषण कटाव की आशंका से हड़कंप मचा हुआ है। जलस्तर के बढ़ने से ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल चिरांद के अलावा तिवारी घाट और नोनिया टोला क्षेत्र पर भी कटाव का गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
अस्तित्व पर मंडराता संकट
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चिरांद समेत नदी के तटीय इलाकों में पिछले कई वर्षों से लगातार कटाव जारी है। बरसात के दिनों में नदी की उफनाती धारा किनारे की उपजाऊ मिट्टी को तेजी से काट रही है, जिससे उपजाऊ खेतों के साथ-साथ देश-दुनिया में अपनी ऐतिहासिक पहचान रखने वाले इस पुरातात्विक स्थल का वजूद खतरे में पड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि समय रहते प्रभावी कटावरोधी कार्य शुरू किए जाएं।
पुरातात्विक धरोहर की सुरक्षा पर सवाल
चिरांद के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहाँ के लोगों की चिंता और भी अधिक गहरी है। हालांकि, पूर्व में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा चिरांद की इस थाती को कटाव से बचाने के लिए पुख्ता कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन धरातल पर स्थायी समाधान का इंतजार आज भी बरकरार है।

प्रशासनिक अमले की नजर
बढ़ती विकट स्थिति को देखते हुए जल संसाधन विभाग हरकत में आया है। विभाग के कार्यपालक अभियंता ने जानकारी दी है कि विभागीय टीम द्वारा जल्द ही स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया जाएगा। स्थिति का जायजा लेने के बाद ही आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, उफनती नदियों के बीच सहमे ग्रामीणों की निगाहें पूरी तरह से प्रशासनिक कदमों और ठोस कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों का साफ कहना है कि यदि अब भी तत्परता नहीं दिखाई गई, तो आने वाले दिनों में तबाही का मंजर और भी भयानक हो सकता है।




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