सपनों की उड़ान में किशोरियों ने कही अपने मन की बात
 
•किशोरियों ने ‘सपनों की उड़ान’ में रखी अपने मन की बात 
•लड़कियों ने कहा –‘हम आसमान छूना चाहती हैं’
•उन्होंने समानता और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सबका सहयोग माँगा ।

मोतिहारी / पटना, 12 फरवरी: सहयोगी संस्था के द्वारा ‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ के अंतर्गत लड़कियों-किशोरियों ने ‘सपनों की उड़ान’ कार्यक्रम में भाग लेते हुए अपने सपनों-आकांक्षाओं के बारे में खुल कर अपनी बात कहीं। इस अवसर पर पटना के दानापुर और बिहटा प्रखंड के विभिन्न गांवों में किशोरियों को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया। आज के इस कार्यक्रम में लगभग दो सौ लड़कियों-किशोरियों ने अपनी प्रतिभागिता की और अपने मन की बात कही।

जेंडर आधारित भेदभाव और हिंसा रोकने के लिए सभी से सहयोग की मांग

सहयोगी संस्था के द्वारा दानापुर और बिहटा में लिंग आधारित हिंसा एवं भेदभाव को समाप्त करने हेतु अलग-अलग कार्यक्रम चलाये जाते हैं। समुदाय में सभी लोगों और हितधारकों के साथ इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए उनसे अलग-अलग स्तर पर संवाद स्थापित कर उन्हें जागरूक एवं संवेदित किया जाता है। इसी क्रम में संस्था के द्वारा ‘उमड़ते सौ करोड़ अभियान’ के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के  आयोजन द्वारा समुदाय को इस मुद्दे से जोड़कर उनका सहयोग लिया जा रहा है। यह अभियान अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का है एवं जेंडर आधारित हिंसा एवं भेदभाव को सहन नहीं करने के लिए आमजनों को जागरूक करना इसका उद्देश्य है। साथ ही, पर्यावरण को संतुलित-संरक्षित रखने के लिए भी यह सभी के सहयोग की माँग करता है।

किशोरियों को बराबर अवसर देने की आवश्यकता पर जोर

आज के कार्यक्रम के अन्तर्गत दानापुर और बिहटा क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में किशोरियों-लड़कियों को अपनी अपेक्षाओं-आकांक्षाओं के बारे में अपनी बात रखने के लिए प्रतिभागिता कराया गया। किशोरावस्था जीवन का वसंतकाल माना जाता है एवं असाधारण क्षमतावान भी होता है। इस अवसर पर सहयोगी की कार्यक्रम निदेशिका रजनी ने कहा कि आज के आधुनिक समय में भी जेंडर भेदभाव के कारण लड़कियों-महिलाओं को दूसरे दर्जे का समझा जाता है एवं उनपर घर-परिवार की बहुत-सी पाबंदियाँ थोप दी जाती हैं, वे खुलकर अपने में की बात को साकार नहीं कर पाती हैं, उनकी क्षमता और व्यक्तित्व संतुलित ढंग से विकसित नहीं हो पाता है, और बहुत-सी कुंठाएँ और हीनता की शिकार भी हो जाती हैं। यह भी देखा गया है कि जिस घर-परिवार में लड़कियों-किशोरियों को समता-समानता का अधिकार और अवसर उपलब्ध कराया गया है, उन्होंने अपनी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया है, वे किसी मायने में कमतर नहीं हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। उन्होंने आगे कहा कि किशोरावस्था एक संक्रमणकाल होता है एवं इस समय उन्हें सही अवसर एवं मार्गदर्शन अवश्य देना चाहिए।

सपनों की उड़ान का आयोजन

‘सपनों की उड़ान’ कार्यक्रम के आयोजन के द्वारा किशोरियों को अपने सपने, अपनी आकांक्षाओं के बारे में बताने के लिए प्रेरित किया गया, साथ ही उन्हें एक मंच प्रदान किया गया जहाँ वे अपनी इच्छाओं-सपनों के बारे में अपनी बात कह सकें। किशोरियों ने इस अवसर पर चित्रकारी, स्लोगन एवं लिखकर कर अपने सपनों के बारे में बताया एवं उनके सपनों को सभी के समक्ष प्रदर्शित किया गया ताकी उनके अभिभावक एवं अन्य लोग उनके मन की बात को समझ सकें एवं उसके अनुरूप उन्हें अवसर प्रदान करें। 

आसमान छूने की ख्वाहिश

किशोरियों ने अपने भविष्य की योजना के बारे में बताया कि वे क्या बनना चाहती हैं, उन्हें अपने घर-समाज से कैसा सहयोग चाहिए जिससे वे अपने सपनों को पूरा कर सकें, साथ ही, उन्हें सही मार्गदर्शन भी मिल सके। कार्यक्रम में भाग ले रही सिमरी की किशोरियाँ – सुनीता और सुमन ने कहा कि वे पढ़ कर डॉक्टर बनना चाहती हैं, शिवानी ने कहा कि वे घूमना चाहती है, अंशु गाना चाहती है। लोदीपुर की विभा ने भी डॉक्टर बनने के अपने सपने के बारे में बताया और कहा कि वह अवश्य अपना सपना पूरा करेगी। किशोरियों ने कहा कि वे कभी अपने सपनों के बारे में किसी से कुछ बता नहीं पाती हैं, उन्हें इस कार्यक्रम में भाग लेकर बहुत अच्छा लगा कि वे सब के सामने अपने सपनों के बारे में बता सकीं। साझे तौर पर सबने आसमान छूने की ख्वाहिश दर्ज किया।

इस अवसर पर सहयोगी से उन्नित, लाजवंती, उषा, रूबी, मुन्नी, रिंकी, निर्मला, मनोज, धर्मेन्द्र, नितीश, सुरेन्द्र एवं प्रशिक्षु मिली और चैताली ने भाग लिया।