सपना नंदिनी के प्रवचन से भक्तिमय हुआ सीवान का बरियारपुर गांव
✍🏻कुमार विपेन्द्र

सीवान : पचरुखी प्रखंड के बरियारपुर गांव में चल रहे नवदिवशिय शतचंडी महायज्ञ में इन दिनों भगवत कथा की अमृतधारा बह रही है।भक्तजन भगवत कथा का रसपान कर स्वयं को धन्य मान।रहे हैं।बाल व्यास सपना नंदिनी के प्रभावशाली आवाज और संगीतमय कथा वाचन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।
सपना नंदिनी प्रभु कृपा का बखान करते हुए बुधवार को राम विवाह प्रशंग पर प्रकाश डाला।मात्र तेरह वर्षीय बाल व्यास सपना नंदिनी ने कहा कि भगवान को धनुष तोड़ने के लिए गुरु विश्वामित्र ने शुभ समय जानकर आज्ञा दी।
इस बिंदु पर संतो का मत है कि राम ने धनुष को नही तोड़ा,बल्कि धनुष को समय ने तोड़ा।
जब भगवान धनुष के पास पहुचे तो महाराज जनक और महारानी सुनैना ने किशोर राम की शौर्य पर संदेह करते हुए सोचा कि आज एक संत (विश्वामित्र) ही हमारी जग-हंसाई करने पर उतर आए हैं और मन ही मन प्रभु से प्रार्थना करने लगे कि हे भगवान हमारी मान-मर्यादा की रक्षा करना।
लेकिन भगवान ने भक्त की मान रखते हुए जग हंसाई नहीं होने दी।
पूज्य बाल ब्यास सपना नंदिनी ने भगवान की महिमा का व्याख्या करते हुए कहा कि यदि भगवान पर भरोसा हो जाय तो इस धरती पर पतित से पतित व्यक्ति का उद्धार हो जाता है।जैसे अहिल्या का उद्धार हो गया।प्रभु ने अहिल्या जैसी पतित नारी को तार दिया।
नदी किनारे बैठे केवट को भरोसा था कि प्रभु आएंगे और भगवान ने आकर केवट को भी तार दिया। सबरी एक भीलनी थी मगर प्रभु में उसकी अटूट आस्था ने भगवान को आने के लिये बाध्य कर दिया।भगवान ने सबरी के जूठे बेर खाकर भी उसपर अपनी कृपा की वर्षा की।इसलिए कहा गया है “विश्वासम् सो फलदायक:।”प्रभु पर विश्वास कीजिये निश्चय ही आपका उद्धार हो जाएगा।
बाल व्यास सपना नंदिनी पूरे पचरुखी प्रखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुईं हैं।यज्ञ के आयोजनकर्ता श्री श्री 108 श्री संत मुरारीदाश महाराज ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि धन्य हैं वे माता-पिता जिन्होंने सपना नंदिनी जैसी संत को जन्म दिया है।संसार के हर माता-पिता को धर्म सेवार्थ बाल व्यास सपना नंदिनी जैसी संतान पैदा करनी चाहिए।मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिला अंतर्गत पिछोर थाना क्षेत्र की रहने वाली तेरह वर्षीया बाल व्यास सपना नंदिनी से इस संवाददाता की खास बात-चीत हुई ।इस दौरान सपना नंदिनी ने बताया कि पापा (लोधी राजपूत) के साथ में आठ साल की उम्र में मैं वृंदावन गयी थी।वहीं मुझपर ठाकुर जी की कृपा हो गयी और मेरा आकर्षण भगवत कथा की ओर होता गया।फिर क्या था मैंने फैसला किया कि मुझे सन्याशी जीवन ही जीना है।वृंदावन में मैंने साधना भक्ति संस्थान की संस्थापिका साधना दीदी के सानिध्य में शिक्षा-दीक्षा लिया।
कृषक पिता लोधी राजपूत और माता सखी देवी की छः संतानों में सपना नंदिनी चौथे नंबर पर हैं।सपना से छोटा एक भाई और एक बहन हैं।