रौजा स्थित ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम में मकर संक्रांति पर आयोजित कार्यक्रम में संतो व श्रद्धालुओ की जुटी भीड़
◆ सूर्य के उत्तरायण होने के साथ शुरू होता है सभी मांगलिक कार्य -सत्यानंद जी महाराज
◆तीन हजार से अधिक महात्मा और श्रद्धालु भक्तों ने ग्रहण किया चूरा दही का प्रसाद

छपरा.वुधवार को शहर मुख्यालय से सटे प्रखंड के रौजा के ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम में मकर संक्रांति पर संतो और श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में जुटान हुआ.जहां पर यूपी, एमपी, झारखण्ड,बंगालऔर बिहार के कई जिले से आये आश्रम के संतो एवम श्रद्धालुओ ने इस अवसर पर चुरा- दही का प्रसाद ग्रहण किया.मकर संक्रांति पर बोलते हुए सत्यानंद जी स्वामी ने कहा कि मकर संक्रांति के दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है.इसलिए इसको उत्तरायणी भी कहते हैं.शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि यानि नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है I इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है.
प्रति वर्ष की भांति इस भंडारे में करीब तीन हजार से अधिक लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद . भंडारे में स्वामी संतों के साथ काफी संख्या में श्रद्धालु लोगों का भी जुटान हुआ I बिभिन्न जिलों और प्रदेशों से 3000 से अधिक लोगों ने चुरा दही के भंडारे का प्रसाद प्राप्त किया.श्रद्धालुओ में महिलाओं की संख्या भी काफी रही.आश्रम में पहुंची महिलाए सेवा भाव से जूठे वर्तन को साफ करने तथा भंडारे की वस्तुओं तैयार करने में तल्लीनता से जुटी दिखी. बता दें कि संस्थापक गुरु श्री स्वामी आद्वेतानन्द जी महाराज का जन्म छपरा के सरयू नदी किनारे दहियावा में हुआ था. इसको लेकर इस आश्रम से जुड़े स्वामी और श्रधालुओं में छपरा को लेकर विशेष आकर्षण रहता हैI हालांकि बाद में स्वामी जी देश का भ्रमण करते हुए पाकिस्तान के टारी चले गए थे जहा आज भी उनकी समाधी है.
◆2007 से चलता आ रहा है भंडारा :
छपरा में ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम कि स्थापना 2005 में बताई जाती है. आश्रम के निर्माण के उपरांत यहा 2007 से यहां मकर संक्रांति पर चूरा दही के भंडारे का आयोजन किया जा रहा है. भंडारे की व्यवस्था में स्रधालू खुद से सक्रिय रहते है. वही आश्रम में मढ़ौरा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बी.के. सिंह,सोनू सिंह,सुनील मिश्रा,सुरेन्द्र साह सहित अन्य श्रधालुओं के सेवा भाव में जुटे दिखे.इस अवसर पर महात्मा व्यासानंद जी महाराज, शिवानंद जी महाराज, माधवप्रकाशानंद जी महाराज, प्रमेश्वरानंद जी महाराज, शब्दयोगानंद जी महाराज, मढ़ौरा के चिकित्सक डा. बीके सिंह, डा. मंजू सिंह, सहीत अन्य श्रद्धालु और महात्मा मौजुद थे.




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