
मातृ एवं शिशु मृत्यु की रिपोर्टिेग लिखित में करना सुनिश्चित करें : डॉ उषा किरण
- 50 प्रतिशत महिलाओं की मौत पहले 24 घंटे में
- 80 प्रतिशत मातृ शिशु दर रोकना हमारे हाथ में
वैशाली,6 दिसम्बर ।
मातृ एवं शिशु दर पर किस तरह सर्विलांस रिर्पोटिंग हो इसे लेकर सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ उषा किरण सिन्हा ने की। प्रशिक्षण का मुख्य उद्येश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु के कारणों को पहचान कर कारकों का निदान करना है। सिविल सर्जन डा सिन्हा ने कहा मातृ शिशु मृत्यु की रिपोर्टिंग लिखित में करना सुनिश्चित करें । प्रशिक्षण में डॉ प्रमोद ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मातृ एवं शिशु मृत्यु के मुख्यत: तीन कारण हैं एक परिवार की अज्ञानता दूसरा समुदाय की अज्ञानता और तीसरा है स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी। अगर इन लक्षणों को हम पहले ही पहचान लें तो मृत्यु दर को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। प्रत्येक गर्भवती माता का सुरक्षित प्रसव कराकर एवं प्रसव पश्चात देखभाल सुनिश्चित करके एमएमआर के अनुपात को 70 प्रति एक लाख जीवित बच्चों से नीचे ले जाना 2030 का लक्ष्य है। वहीं मातृ मृत्यु दर में प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की भी कमी लानी है।
80 प्रतिशत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर रडार में
डॉ पंकज मिश्रा ने कहा कि 80 प्रतिशत प्रसव निजी तथा सरकारी अस्पतालों में होते हैं। ऐसे में अगर सही जागरूकता हो तो 80 प्रतिशत मातृ एवं शिशु दर को हम रोक सकते हैं। डॉ मिश्रा ने कहा कि 5 प्रतिशत माता एवं शिशु की मौत एएनसी सर्विस नहीं मिलने के कारण होती है। वहीं 20 प्रतिशत मौंते प्रसव के दौरान होती हैं और 50 प्रतिशत मौतें प्रसव के 24 घंटे के दौरान होती है। जिसे सही प्रशिक्षण और सही सर्विलांस की बदौलत रोकी जा सकती है।
मौत की सूचना पर आशा को 200 रुपये –
डॉ प्रमोद ने कहा कि 15 से 49 वर्ष की किसी भी महिला की मौत पर अपने एएनएम को खबर देने पर आशा को 200 रुपए दिए जाते हैं। ताकि गांव स्तर से मृत्यु के कारण की रिपोर्टिंग सही तरीके से हो।
जिले की यह है स्थिति –
जिला स्वास्थ्य समिति के प्रभारी योजना समन्वयक सुजीत कुमार ने बताया कि जिले में अप्रैल 2021 से अभी तक 6 माताओं तथा 117 नवजातों की मृत्यु हुई है। वहीं बिहार में भी मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आयी है। वर्ष 2004 – 06 में बिहार का मातृ मृत्यु अनुपात 312 से कम होकर 2020-21 में 149 (एसआरएस 2016-18 के अनुसार) हो गया है। यह गिरावट 52 प्रतिशत है। प्रतयेक वर्ष एक लाख जीवित बच्चों के अनुपात में 149 माताओं की मृत्यु केवल बिहार में होती है। मौके पर सिविल सर्जन डॉ उषा किरण सिन्हा, अस्पताल के उपाधीक्षक, डॉ अनिल, डीपीएम मणिभूषण झा, जिला मुल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी चंद्रशेखर, डीसीएम निभा रानी सिन्हा, जिला सलाहकार गुणवत्ता डॉ ज्ञानेन्द्र कुमार, केयर डीटीएल सुमित कुमार सहित सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थति थे।




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