बेतिया – संसार के कार्य में सहयोग देनेवाले, शिल्प कलाधिपति, तकनीकी जगत के भगवान विश्वकर्मा की पूजा का त्योहार हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है

न्यूज इनपुट विजय कुमार शर्मा प,च,बिहार:–
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा का जन्म माघ शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था, इन्हें भगवान शिव का भी अवतार माना जाता है। इनके बारे में बताया है कि यह देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, महल और आभूषण आदि बनाने का काम करते हैं। इनको दुनिया का पहले वास्तुकार और इंजीनियर की उपाधि दी गई है।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा के दिन उघोगों और फेक्ट्रियों में लगी हुई मशीनों की पूजा की जाती है
भगवान विश्वकर्मा की पूजा कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में की जाती है और उनकी आराधना की जाती है। कारीगरों की मान्यता है कि विश्वकर्मा की पूजा करने से मशीनें जल्दी खराब नहीं होती हैं और काम करते समय धोखा नहीं देती है. इस दिन सब काम रोककर मशीनों और ओजारों की साफ-सफाई की जाती है और पूजा की जाती है।
जानें कितने विश्वकर्मा हुए
भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर शास्त्रों में जो कथाएं मिलती हैं उससे ज्ञात होता है कि विश्वकर्मा एक नहीं कई हुए हैं और समय-समय पर अपने कर्मों और ज्ञान से सृष्टि के विकास में सहायक हुए हैं। सबसे पहले हुए विराट विश्वकर्मा इन्होंने सृष्टि के निर्माण ब्रह्माजी की सहायता की। इसके बाद धर्मवंशी विश्वकर्मा, अंगिरावंशी विश्वकर्मा, सुधन्वा विश्वकर्म हुए फिर शुक्राचार्य के पौत्र भृगुवंशी विश्वकर्मा हुए। शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा के इस वर्णन से यह संकेत मिलता है कि विश्वकर्मा एक प्रकार का पद और उपाधि है जो शिल्पशास्त्र का श्रेष्ठ ज्ञान रखने वाले को कहा जाता था। इन सभी में प्रधान विराट विश्वकर्मा हैं जिन्हें प्रथम विश्वकर्मा माना जाता है इनके पांच मुख होने का वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है।
भगवान विश्वकर्मा के प्रमुख निर्माण
माना जाता है इंद्र का अस्त्र वज्र का निर्माण विश्वकर्मा ने ही तैयार किया था। जगत के निर्माण के लिए इन्होंने भगवान ब्रह्मा की सहायता की। लोकमान्यताओं के अनुसार, उड़ीसा स्थित भगवान जगन्नाथ समेत बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। कथा है कि भगवान राम के परम भक्त हनुमानजी ने जब लंका को जला दिया था तब रावण ने विश्वकर्मा को बुलवाकर सोने की लंका का फिर से निर्माण करवाया था। भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर विश्वकर्मा ने द्वारका नगरी का निर्माण किया था।




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