गोपालगंज/सारण। कैबिनेट में नियोजित शिक्षकों के लिए सेवा शर्त नियमावली पुनः 2015 के पश्चात फिर इस कोरोना काल मे बिहार सरकार ने पुनर्गठित किया गया है।इसकी मैं पुरजोर विरोध करती हूं साथ ही बिहार सरकार एंव मुख्यमंत्री से यह मांग करती हूं कि यदि सरकार में थोड़ी भी संवेदना शेष है तो यह “कमेटी गठन” सिलसिला के रूप में नियोजित एवं वित्त रहित शिक्षकों के साथ विविध छलावा बंद करते हुए इनके साथ सकारात्मक रवैया अपनाएं ।उक्त बातें पूर्व जिला पार्षद व सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भावी विधान परिसद प्रत्याशी डॉ. अनुजा सिंह ने प्रेस वार्ता में कहीं।साथ ही उनकी मांगों में नियोजित व वित्तरहित शिक्षकों के कई प्रमुख समस्याएं शामिल है।जिसमे प्रमुख रूप से इसी विधानसभा निर्वाचन वर्ष 2020 में पूर्व सेवा शर्त निर्मित ही नहीं की जाए अपितु वह लागू भी हो।इसकी मांग की गई है।श्रीमति सिंह का कहना है कि एक बार सेवा शर्त लागू हो जाता है तो स्वयं अनेक विसंगतियां जिन्हें विभिन्न रूपों में बिहार के समस्त नियोजित शिक्षक झेल रहे हैं एवं उनका परिवार भी झेल रहा है, वह इसे पारदर्शिता देते हुए दूर कर देगी। उसी तरह कैबिनेट से वित्त रहित शिक्षक बंधु भी यह आशा लगाकर बैठे थे कि नामांकन लिस्ट में अथवा पोर्टल में वे महाविद्यालय भी आ जाए जो नहीं थे। जिनके कारण वित्त रहित शिक्षक एवं महाविद्यालय कर्मी ही नहीं समाज भी चिंतित है। क्योंकि यह छात्र छात्राओं के लिए नामांकन से संबंधित रखने का कारण सिद्ध होगा। अतएव सरकार इन उपयुक्त मुद्दों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र कदम उठावे।