
तो जल्द होगा अधिकारियों के काले धन का खुलासा
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पत्रकारों के हाथ लगे पुख्ता साक्ष्य
——————–दैनिक खोज खबर के _ उमेश सिंह पटेल ———————
सिवान/ पचरूखी :- पचरूखी चीनी मिल की जमीन की नीलामी
में बनाई गयी अवैध बेनामी संपत्ति और काले धन का खुलासा जल्द ही होगा।”इण्डिया न्यूज़ लाइव” के संवाददाता के नेतृत्व में लगभग आधा दर्जन खोजी पत्रकारों के हाथ पुख्ता साक्ष्य लगे हैं।इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय प्रशासन के कई अधिकारी इस बहती गंगा में हाथ धोकर पाक-साफ बने हुए हैं।इसमें छोटे-छोटे साधारण से परिवार से ताल्लुकात रखने वाले कृषि आधारित परिवार भी लाखों की संपत्ति अपने नाम करा लिए हैं।वह भी नोटबंदी के इस दौर में।जिससे आस-पास के गांव के लोगों में यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर ऐसे लोगों की आमदनी का स्रोत क्या है ?आखिर नोटबंदी के चंद महीनों बाद ही ऐसे साधारण लोगों के पास इतनी क्षमता कहां से आ गयी?आम लोगों के द्वारा पूछे जाने वाले ये यक्ष प्रश्न हर किसी को सकते में डाल देते हैं।
जब “इण्डिया न्यूज़ लाइव” के जिला संवाददाता के नेतृत्व में आधा दर्जन पत्रकारों ने इस दिशा में अपनी पड़ताल चालू की तो की कई चौकाने वाले तथ्य सामने आये।पड़ताल के दौरान स्थानीय प्रशासन के दो अधिकारियों ने तो इस संवाददाता को अजीबो-गरीब सलाह तक दे डाली।सलाह में कहा गया औकात में रहिये फायदा होगा।
पड़ताल के दौरान यह भी पता चला कि चीनी मिल के समीप इस वर्ष मई के दूसरे पखवाड़े में एक बेहद ही साधारण से परिवार ने पति-पत्नी के नाम 34 लाख से ज्यादा मूल्य की बेनामी व्यवसायिक भूमि खरीदी गई।
पचरुखी प्रखंड क्षेत्र के आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक साधारण सा व्यक्ति 34 लाख की जमीन कैसे क्रय कर लिया?यह जांच का विषय है।
उधर चीनी मिल की जमीन से सम्बंधित हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले याचिका कर्ता उमेश कुमार ने आरोप लगाया है कि अपनी बेनामी सम्पति को बचाने के लिए मुझे और स्थानीय दर्जनों किसानों को झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया।श्री कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री से इस दिशा में हस्तक्षेप करते हुए सीबीआई या निगरानी विभाग से जाँच कराकर बेनामी सम्पति धारी अधिकारियों पर कारवाई तथा इनकी संपत्ति जब्त करने की मांग की है।




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