तिहरा हत्याकांड : वैश्य टोली के युवाओं का शराब विरोध पड़ा भारी

सिवान। भगवानपुर हाट थाना क्षेत्र के मलमलिया चौक व कौड़ियां में शुक्रवार को तीन लोगों की हुई हत्या की घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भगवानपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष सूरज कुमार चौधरी के खिलाफ नाराजगी है। लोगों का कहना है कि कौड़ियां वैश्य टोली गांव के युवाओं द्वारा पूर्व में शत्रुघ्न सिंह के खिलाफ दिए आवेदन व गुरुवार को कन्हैया सिंह द्वारा भगवानपुर हाट थाने को दिए आवेदन पर तत्काल कार्रवाई हुई रहती, तो संभव था कि शुक्रवार की घटना नहीं होती। वैसे मामले में लापरवाही को लेकर डीआइजी द्वारा थानाध्यक्ष के निलंबन की कार्रवाई हत्याकांड के बाद की गई है, लेकिन घटना ने मृतकों के स्वजनों को जो जख्म दे दिया, उसकी भरपाई तो संभव ही नहीं है। लोगों का कहना है कि शत्रुघ्न सिंह आपराधिक  गतिविधियों में शुरू से ही शामिल रहा है। उसने गलत तरीकों से रुपये कमा चिमनी खोल ली व कई वाहन भी खरीदे। उसकी पत्नी आज भी मलमलिया, बसंतपुर सहित अन्य बाजारों के कई दुकानदारों को रुपये कर्ज देकर जबरन अधिक ब्याज की उगाही भी करती है।

शनिवार को अपनों को खोने का दर्द स्वजनों के चहरे पर साफ दिखा। मृतकों के घरों से रुक-रुक कर महिलाओं के करुण-क्रंदन की आवाज लोगों का सीना बेध रही थी। सबसे खराब स्थिति पूर्व मुखिया अखिलेश सिंह की थी। इस कांड में उन्होंने अपने इकलौते बेटे रोहित को खो दिया। गांव में जातिगत तनाव की घटना बस कुछ खास मौकों पर ही सामने आती थी।

एक माह से चल रहा था विवाद:

स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के युवाओं द्वारा आवेदन देने की बात सामने आते ही शत्रुघ्न सिंह उग्र हो गया था। आपराधिक छवि का धौंस दिखाते हुए उसने आवेदन देने वाले युवाओं में से एक को पकड़ मारपीट की। इसी के साथ गांव में दोनों पक्षों में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। बताते हैं कि दोनों पक्षों से एक-दूसरे को पकड़ मारपीट का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसा नहीं था कि प्रशासन मामले से अंजान थी, लेकिन उसको इस बात का थोड़ा भी एहसास नहीं हुआ कि इन छोटी मारपीट की घटनाओं का अंजाम इस तरह से होगा। फिलहाल लोगों का यह कहना है कि घटना में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।