रांची(झारखण्ड) : देश के उभरते हुए डायग्नोस्टिक श्रृंखला ने अपने नवीन सॅटॅलाइट लैब के उद्घाटन की घोषना की। अपनी 36 साल की सफलता के पदचिन्हो पर चलते हुए 2015 में अपोलो ने इस क्षेत्र में कार्य आरम्भ कर दिया था। इस नए लैब के उद्घाटन के साथ ही अपोलो के 50 लैब पूरे भारत में स्थापित हो जाएंगे। यह नयी लैब रांची में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर तकरीबन 3500 टेस्ट करवाने की क्षमता रखेगी। इसके अतिरिक्त, सैंपल संग्रह केंद्र को भी रांची में स्थापित करने की योजना बनाई गयी है जिससे रांची व् झारखण्ड की जनता को इसका लाभ मिल सके।
इस नयी सॅटॅलाइट लैब का उद्घाटन डॉ पि डी शर्मा, अध्यक्ष- रेड क्रॉस सोसाइटी, रांची तथा अपोलो डायग्नोस्टिक्स के सी ओ ओ श्री रविंद्र कुमार द्वारा किया गया। इस समारोह में अपोलो टीम के कई बड़े अधिकारी जैसे राजीव कुंडू -हेड बिज़नेस डेवलपमेंट, वीर विजय – बिहार व झारखण्ड के रीजनल सेल्स मैनेजर, धर्मेश कुमार, तरुण सैनी अवं अन्य कर्मचारी भी उपस्थित थे।
अपोलो डायग्नोस्टिक हर साल तकरीबन 315 मिलियन उच्च गुणवत्ता वाले टेस्ट्स करता है। इसकी समृद्धता इस बात का प्रमाण हैं की इसने सदैव अपने उपभोग्ताओ को कम दामों में सर्वोच्च सुविधाएं दी हैं। सन 2015 में केवल 100 केंद्र थे, सन 2016 में 150 और 2017 तक 250 संग्रह केंद्र, 1 राष्ट्रीय संदर्भ लैब, 4 क्षेत्रीय संदर्भ लैब, 40 से ज़ादा सॅटॅलाइट लैब्स, 20 से ज़ादा HLM बनाये गए और आज यहां 550 से ज्यादा डायग्नोस्टिकस केंद्र है। इसके पश्चात् 2019 तक इनका लक्ष्य 700 से ज्यादा डायग्नोस्टिकस, 1 राष्ट्रीय संदर्भ लैब, 4 क्षेत्रीय संदर्भ लैब, 40 से ज़ादा सॅटॅलाइट लैब, 45से ज्यादा हॉस्पिटल लैब मैनेजमेंट और 10 से ज्यादा रिटेल लैब मैनेजमेंट की स्थापना करना है। अपोलो के विशेषज्ञ और उनके उपकरण जांच की सटीकता एवं प्रतिबद्धता का दावा देते हैं।
आज समारोह में सीईओ श्री चंद्र शेखर जी ने कहा की ” अपोलो अपने 3 दशकों के अनुभव से यह भली भाती समझ चुका है की डायग्नोस्टिक्स का एक रोगी की चिकित्सा में कितना महत्त्वपूर्ण योगदान है। हम समस्त प्रकार की डायग्नोस्टिक सेवाएं देने के लिए सदैव प्रतिबद्ध हैं। उन्नत परिक्षण और अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर्मचारियों से लैस, यह एक डायग्नोस्टिक्स और पैथोलॉजी लैब है जो शुरुआत में ही स्वास्थ्य समस्याओं को समझने और रोकने का वादा करता है। रांची में हमारी सॅटॅलाइट लैब प्रयोगशाला का शुभारंभ उस दिशा में एक और कदम है और हमें विश्वास है कि इससे लोगों को अत्यधिक लाभ होगा। ”

इसके अलावा श्री रविंद्र कुमार, सीओओ, अपोलो डायग्नोस्टिक्स एंड डायलिसिस ने कहा की अपोलो डायग्नोस्टिक्स में हमारा मिशन है की हम देश के सारे रोगियों को सशक्त बनाये की वो अपने स्वास्थ्य की पूरी स्थिति जान सके। होरिबा 5 भाग हेमटोलॉजी एनालाइज़र और ड्राई केमिस्ट्री एनालाइज़र जैसे उन्नत उपकरणों की शुरूआत सटीकता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करती है, जिससे डॉक्टरों को सही निदान प्रदान करने में सक्षम बनाया जाता है।
प्रमुखताएँ
• हार्मोन्स केमिलुमिनेसेंस के लिए (एक नैदानिक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाता है): उच्च सटीकता और विशिष्टता।
• असामान्य हीमोग्लोबिन की पहचान करने के लिए स्वस्थानी संकरण या ऍफ़ आई स च , हाई रेसोलुशन कार्योटाइप और हीमोग्लोबिन (Hb ) एच् बी इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसे उच्च साइटोजेनेटिक परीक्षणों की उपलब्धता।
• हिस्टोपैथोलॉजी और साइटों पैथोलॉजी के लिए, पैप स्मीयर और एलबीसी स्क्रीनिंग और गर्भाशय ग्रीवा के प्रारंभिक घावों का जल्द पता लगाने के लिए।
अपोलो का मानना है कि बेहतर उपचार और रोगी देखभाल के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले निदान आवश्यक हैं। उन्होंने प्रभावी ढंग से एक शक्तिशाली वितरण नेटवर्क विकसित किया है और स्केलेबल तकनीक और गहन विश्लेषण के साथ अद्वितीय वितरण मॉडल बनाया है, जो भारत में व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवा को आसान, उपलब्ध और सस्ती बनाता है।