जांच के लिए कम पड़ गया 36 महीना,मामला है आचार्य केशवानंद गिरी हत्याकांड

मांझी(सारण)। सारण जिला प्रशासन ने एक सप्ताह में हत्या की गुत्थी सुलझाने का किया था वादा। 36 महीने गुजर गए पर हत्या की गुत्थी सुलझा नही सकी सारण की पुलिस। मांझी थाना क्षेत्र के रघुनाथ गिरि के मठिया गांव निवासी व मांझी विधान सभा के पूर्व प्रत्याशी तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता आचार्य केशवानन्द गिरि की हत्या के 36 माह बीत जाने के बावजूद पुलिस के लिए यह मामला अबुझ पहेली बना हुआ है। उक्त लम्बी अवधि में भी पुलिस के हाथ खाली होने से पुलिसिया जांच पर ही सवालिया निशान खड़ा होने लगा हैं। स्वर्गीय गिरि की हत्या के कारणों का सुराग पुलिस को हाथ नहीं लग सका। जिससे ग्रामीणों का पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है। घटना के दिन पुलिस ने हत्यारों को पकड़ने के लिए महज एक सप्ताह का समय मांगा था।
घर से बुलाकर की गयी थी हत्या
वरीय समाजसेवी व भाजपा नेता केशवानन्द गिरि की हत्या अपराधकर्मियों ने घर से बुलाकर की थी। बता दें कि अपराध कर्मियों ने 25 जनवरी 2017 की रात लगभग दस बजे दो लोग घर आये औऱ अपनी बाइक खराब होने की बात कह कर उन्हें घर से बुला कर ले गये तथा घर से थोड़ी दूर दक्षिण दिशा के तरफ ले जाकर गोली मारकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थीं। घटना की जानकारी सुबह में तब हुई, जब राहगीरों ने सड़क पर पड़े हुए शव को देखा। शव को देखकर परिजनों को सूचना दी गई थी।
सुशील मोदी व सांसद सिग्रीवाल सहित कई पक्ष व विपक्ष के नेताओं ने परिजनों से मिल कर न्याय दिलाने का दिया था आश्वासन।
घटना के बाद सुशील कुमार मोदी व सांसद सहित कई नेताओं ने रघुनाथ गिरी के मठिया पहुंच कर अपराधकर्मियों को पाताल से ढूंढ कर निकालने का आश्वासन दिया था। लेकिन पाताल से कौन कहे जमीन से खोज निकालने की बात भी सिर्फ नेताओं के भाषण तक ही धरी की धरी रह गयी। नेताओ ने केशवानन्द गिरी के घर पहुंच कर हत्याकांड के सम्बन्ध में बेटे तथा पत्नी के जानकारी प्राप्त की थी एवम मृतक के परिजनों को उच्च स्तरीय न्यायिक जांच तथा एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया था। मोदी ने कहा था कि यह घटना योजना बद्ध तरीके से की गयी है। मालूम हो कि तब राजद जदयू गठबंधन की सरकार थी तथा डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव हुआ करते थे। श्री मोदी ने तब की सरकार को जंगल राज की संज्ञा दी थी। हालांकि परिस्थिति बदली और श्री यादव की जगह श्री मोदी बिहार के डिप्टी सीएम बन गए। लोगों की उम्मीदों को भी पंख लग गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय गुजरने के साथ ही अब पुलिस प्रशासन से विश्वास उठता जा रहा है। बावजूद इसके न्याय प्रक्रिया से परिजन न्याय की उम्मीद सँजोये बैठे हैं।




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