जन-सरोकार की पत्रकारिता व ग्रांउड जीरो की रिपोर्टिंग ही हमें, हमारी विश्वसनीयता वापस दिखाएंगी : नवीन सिंह परमार

✍नवीन सिंह परमार (निदेशक : परमार डाॅट काॅम)
🔴आज पत्रकार व पत्रकारिता दोनों संकटकाल से गुजर रहे है । हमारी विश्वसनीयता खतरे में है । इसके लिए कोई दूसरा दोषी नहीं है बल्कि हम स्वंय जिम्मेवार है ।हम लोग अपनी मुल पहचान जन-सरोकार की पत्रकारिता छोड़कर किसी खास विचार व संगठन की पत्रकारिता करने लगें है । हम जनता की आवाज बनने के बदले किसी व्यक्ति व व अपने मीडिया हाउस की आवाज बन गए है । इसका भयावह परिणाम सामने आया है कि हमारी विश्वसनीयता ही आज संकटग्रस्त हो चला है ।
एक पत्रकार के नाते सीधे सीधे ग्रांउड जीरो से जुड़ी खबरो पर काम करना यही हमारी ताकत है और यही हमारी पहचान रही है, लेकिन हम अपनी मुल काम को ही भूलने लगें है ।अगर हमें जनता में अपनी विश्वसनीयता को पुन: स्थापित करना है तो हमें सरकारी रिपोर्ट, नेताओं की बयानबाजी, बड़े संगठनों के इवेंट की रिपोर्टिंग छोड़कर जनसरोकार से जुड़े मसले को उठाना होगा । जनता के सवालो को उठाते रहिए सत्ता के शीर्ष पर बैंठे सबसे ताकतवर व्यक्ति कि हैसियत नहीं है कि आपका कुछ बिगाड़ सके । भले ही वे आपको अपने मीडिया हाउस से निकाल दें , लेकिन जनता के दिल से वो नहीं निकाल सकते है और जिस दिन आप जनता के दिल में बसने लगेंगे, उस दिन आपकी विश्वसनीयता पुन: कायम हो जाएगी । हम पत्रकारों के लिए यही परमवीर चक्र का सम्मान होगा ।अगर हमें अपनी विश्वसनीयता बनाये रखना है तो बस एक ही मंत्र है जनसरोकार से जुड़ी खबरो से समझौता नहीं करना है कितना भी बड़ी व्यक्ति क्यों ना हो आपको हिला नहीं सकता है ।बस इसी मंत्र के सहारे पत्रकारिता से जुड़े रहने की जरूरत हैं। बस हमें करने में संतुष्टी भी मिलेगा और अपने शर्त पर काम भी मिलेगा ।