
छपरा: भोजपुरी लोकगीतों में अपनी अलग पहचान बना रहीं छपरा की बेटी शिवानी पांडेय ने सुल्तानगंज में कांवरियों के बीच अपनी गायकी से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु झूम उठे। भागलपुर जिला प्रशासन के आमंत्रण पर शिवानी ने यहां आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में भगवान शिव की भक्ति से ओतप्रोत गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए शिवानी ने “माई के चरनियां में बसल बाड़ भोला”, “बोले कांवरिया हरे-हरे”, “अरघ देहम जोड़े-जोड़े” और “निमिया पे झुलवा लागे…” जैसे प्रसिद्ध शिवभक्ति और लोकगीतों से पूरे माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। गीतों की इन धुनों पर कांवरिया श्रद्धालु झूमने के साथ-साथ भगवान शिव के जयकारे भी लगाते नजर आए।
संगीत के प्रति समर्पण और संघर्ष
छपरा के हरेंद्र पांडेय और शकुंतला देवी की पुत्री शिवानी ने कम उम्र में ही कला के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। अपनी प्रारंभिक शिक्षा निजी विद्यालय से पूरी करने के बाद उन्होंने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के जयप्रकाश महिला महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनका झुकाव संगीत की ओर बढ़ने लगा।शिवानी बताती हैं कि स्नातक की पढ़ाई के वक्त उनके पिता ने उनकी छिपी हुई प्रतिभा को पहचाना और मोबाइल पर ही हारमोनियम डाउनलोड कर उन्हें रियाज करने के लिए प्रेरित किया। पिता के इस प्रोत्साहन ने उनके संगीत प्रेम को और गहरा कर दिया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न मंचों पर प्रस्तुतियां देना शुरू किया।

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लोक संस्कृति को सहेजने का संकल्प
शिवानी का मानना है कि भोजपुरी केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, संस्कार और परंपराओं की सच्ची पहचान है। उनका मुख्य उद्देश्य भोजपुरी के पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और अश्लीलता से दूर रहकर लोकगीतों की समृद्ध थाती को आगे बढ़ाना है।उनके गाए गीतों में सोहर, झूमर, कजरी, चैता, छठ पर्व और शिवभक्ति गीतों की विशेष झलक मिलती है। सुल्तानगंज में कांवरियों से मिले अपार स्नेह और सराहना ने छपरा की इस बेटी के हौसले को और बुलंद कर दिया है। भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा मिले इस मंच ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकसंस्कृति की मिट्टी से जुड़ी प्रतिभाएं बड़े मंचों पर भी अपनी विशिष्ट छाप छोड़ने में पूरी तरह सक्षम हैं।




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