गुड़िया जा रही है न्यूज़ीलैंड, बदली किस्मत
विनीत कुमार, छपरा
सारण जिले की एक बच्ची को न्यूजीलैंड के रहनेवालों ने गोद लिया है।
बुधवार के दिन न्यूजीलैंड से आई रिबेका व उनकी माँ यूलांडा ने सारण समाहरणालय पहुचकर सारी कागजी कार्यवाईया पूरी की व गुड़िया को गोद लिया। जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद ने अपने कार्यालय में न्यूजीलैंड से आये दोंनो महिलाओ से बात की व उन्हें गुड़िया को सुपुर्द किया।

डीएम ने गुड़िया से पूछा : व्हाट इज योर नेम
सारण की गुड़िया के सपनों को अब नई उड़ान मिलेगी। 5 वर्ष की गुड़िया अपने माँ रेबेका की गोद मे खेल रही थी। जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद के कार्यालय प्रकोष्ठ में इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए उप विकास आयुक्त रौशन कुशवाहा व एडीएम अरुण कुमार समेत अन्य उपस्थित थे।

बात ही बात में डीएम ने गुड़िया से पूछा कि व्हाट इज योर नेम, गुड़िया ने तपाक से अपना नाम बताया। फिर डीएम साहब ने अगला सवाल न्यूजीलैंड से आई रेबेका की ओर इशारा करते हुवे पूछा कि हु इज शी तो गुड़िया बोली मॉम।
इसके बाद सभी अधिकारी मुस्कुराने लगे। तभी एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि गुड़िया को न्यूज़ीलैंड में कोई दिक्कत न हो इसलिए वो इंग्लिस सीख रही है जबकि रेबेका व उसके परिजन हिन्दी सीख रहे हैं।

प्रभूनाथ नगर स्थित दत्तक केंद्र में कार्यरत प्रवीर कुमार सिन्हा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संस्था कार्यरत है जिसका नाम है “आफा”. यह संस्था ऐसे बच्चों को विदेश में रह रहे लोगो को अपनाने का मौका देती है जिन्हें उनके परिजन जन्म के उपरांत छोड़ चुके होते हैं।
यही रेबेका ने ऑनलाइन आवेदन आज से करीब 6 माह पहले किया था जिसका नम्बर कुछ दिन पूर्व आया व रिबेका गुड़िया को अपनाने के लिए सारण आयी।

दैनिक खोज खबर से विशेष बातचीत में रिबेका ने बताया कि वो भारत की सभ्यता व संस्कृति से काफी प्रभावित है इसलिए उसने भारतीय बच्चे को अपनाने का निश्चय किया। उसने बताया कि उसके इस निर्णय से परिजन काफी खुश हैं।




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