गरीबी से परेशान फिर भी सामाजिक सुधार की चाह में चला रहा अभियान
मांझी(सारण) : मोटरसाइकिल पर कपड़ा का गट्ठर लाद कर फेरी करके परिवार को दो जून की रोटी का जुगाड़ करने निकला सेराज भाई जल संग्रह का अनूठा संदेश दे रहा है। छपरा शहर के अजायब गंज का निवासी 50 वर्षीय सेराज वर्तमान सामाजिक परिवेश से बेहद खिन्न है। वह सामाजिक गतिविधियों में सुधार के लिए बड़ा अभियान चलाना चाहता है पर उसकी गरीबी उसकी चाह में वाधक बनी हुई है। उसकी पांच सन्तानो में दो बेटियां बिहार पुलिस में बहाल हो चुकी हैं जबकि एक बेटा व दो बेटे अभी स्कूली शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। साइकिल पर लदा कपड़े का भारी भरकम गट्ठर लेकर वह प्रतिदिन दस पन्द्रह गांवों की फेरी लगाकर प्रतिदिन पांच सौ से एक हजार रुपया तक कमा लेता है। राह चलते लोगों को भी रोक कर उनसे बुरी आदतों का परित्याग करने की अपील करता है। पानी के संरक्षण के प्रति रोज रोज वह दर्जनों लोगों को सच्ची सलाह देता है। उसका सलाह किसी सन्त अथवा विद्वान से कम नही होती। कभी कभी लोग उसे पागल करार देते हैं पर इस बात की वह परवाह नही करता। साइकिल के पीछे बड़ा बोर्ड लगा हुआ है जिसपर बहुत बड़ा सन्देश स्वतः प्रचारित होता रहता है। वह कपड़ा के दाम में मोलभाव नही करता मामूली पारिश्रमिक लेकर एक दाम में वह कपड़ा बेचता है। साइकिल की गति से हमेशा ईश्वर अल्लाह का नाम जपते रहना उसकी फितरत है। रास्ते में मिलने वाले बेहद गरीब व घायलों की वह अपनी क्षमता के मुताबिक सहायता करता है तथा इसके लिए लोगों को प्रेरित भी करता है। वह किसी तरह से प्रचार पाने से परहेज करता है। बीए पास सेराज का कहना है कि नेपथ्य में रहकर ईश्वर का नाम स्मरण व मजलूमों की सेवा ही सच्ची मानवता है।