धर्मेंद्र रस्तोगी/छपरा, 1 अक्टूबर: गंडक नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण सारण जिले में बाढ़ ने गंभीर रूप ले लिया है। जिला प्रशासन से प्राप्त अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 7 प्रखंडों के 102 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन की ओर से युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।

बाढ़ की मुख्य स्थिति और आंकड़े एक नजर में

  • प्रभावित प्रखंड: पानापुर, तरैया, अमनौर, मकेर, परसा, दरियापुर और सोनपुर (कुल 7 प्रखंड)
  • प्रभावित पंचायतें: 25 पंचायतें
  • प्रभावित गांव: 102 गांव
  • प्रभावित आबादी: करीब 1 लाख 70 हजार 25 लोग (36,250 परिवार)
  • सुरक्षित निष्क्रमण: अब तक 15,400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

राहत और बचाव कार्य तेज, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ तैनात

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

  • राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की कुल 4 टीमें मैदान में तैनात हैं।
  • लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नावों का लगातार परिचालन किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त नावें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

स्वास्थ्य, भोजन और पशुओं के लिए विशेष इंतजाम

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव के निर्देश पर प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जा रहा है:

  • चिकित्सा सेवा: क्षेत्र में कुल 20 चिकित्सा शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां बीमार और जरूरतमंद लोगों को आवश्यक इलाज मिल रहा है।
  • भोजन और राशन: राहत केंद्रों और सामुदायिक रसोई के माध्यम से पीड़ितों को भरपेट भोजन कराया जा रहा है। इसके अलावा जरूरतमंद परिवारों को फूड पैकेट, ड्राई राशन और पॉलीथिन शीट का वितरण किया जा रहा है।
  • पशुओं की सुरक्षा: बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मवेशियों के लिए पशु चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। साथ ही पशुपालकों के लिए पर्याप्त मात्रा में पशु चारे की व्यवस्था और वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

प्रशासन की ओर से सभी संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।