खुद को भावी मुख्यमंत्री बताने वाली पुष्पम प्रिया ने मढ़ौरा बंद चीनी मिल पहुंच बढ़ाई सरगर्मी
संजीव कुमार मढ़ौरा,सारण । बिहार की राजनीति में खुद को भावी मुख्यमंत्री बताकर प्रवेश करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी मंगलवार को अचानक से मढ़ौरा के बंद चीनी मिल पहुंच कर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी। पुष्पम प्रिया चौधरी ने स्थानीय युवाओं के साथ बंद चीनी मिल की जानकारी लेने के साथ मिल के अंदर तक गयी । मिल के मशीनी पाट्स और संसाधन का खुल्लेयाम हो रही चोरी को स्थानीय प्रशासन के लिये शर्मनाक बताया । पुष्पम प्रिया चौधरी स्थानीय युवाओं की आवाज पर मढ़ौरा पहुंची थी
। पुरे मामले को पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपने फेसबुक पर अपलोड किया । लिखा कि 1904 में बिहार का सबसे पहला मढ़ौरा सुगर मिल 94 साल के बाद 1998 में बंद हो जाता है । दो हजार वर्कर परिवार बेकार, गन्ना कैश-क्रॉप पर आश्रित मढौरा,अमनौर, दरियापुर, बनियापुर, तरैया, मशरक, मकेर, परसा आदि गांवों के बीस हजार किसान की हजारों एकड़ खेती बर्बाद हो जाती है । मिल का 1500 एकड़ अरबों की कीमत वाली इंडस्ट्रियल जमीन व्यर्थ पड़ी हुई है । किसानों का 20 करोड़ से ज्यादा का बकाया है, पूरा क्षेत्र खंडहर, वीरान, जमीन, मिल सब अतिक्रमण और चोरी का शिकार है ।
स्थानीय 22 साल के एक आदर्शवादी युवक बसंत सिंह राजपूत मुझे सारण का ऐतिहासिक मढ़ौरा चीनी मिल को दिखाते भावुक हो जाता हैं कहता है आप इसको जरूर बचाइयेगा । फेसबुक पेज पर ही पुष्पम प्रिया चौधरी ने युवा बसंत को आश्वस्त किया कहा कि बसंत, आपको मेरा वादा रहा, इसी जगह फिर मिलेंगे, जब आपका सपना पूरा करेंगे। अपने फेसबुक से लेट्स ओपेन बिहार, 30 साल का लॉक डाउन का नारा दिया ।
बंद चिनी मिल के साथ अन्य मिलों की दुर्दशा को देखा पुष्पम प्रिया चौधरी चीनी मिल के साथ बगल में स्थित बंद हुये सारण इंजीनियरिंग, सारण डिस्लरीज, मॉर्टन फैक्टी के बारे में भी जाना । इन फैक्ट्रियों तक जाकर मढ़ौरा की बदहाली को देखा और इसके लिये कुछ करने की जरुरत की बात कही । पुष्पम प्रिया चौधरी नें मौके पर कहा कि बिहार की बदहाली को युवा ही बदल सकते है और युवा के सहारे ही बिहार बदलेगा भी । जरुरत है सभी को बिहार के बारे में सोचने की ताकी बदलाव को जमीन पर उतारा जा सके ।