परवेज अख्तर /सिवान

जल जीवन हरियाली का संदेश विश्वभर में फैलाने के बने सारथी


प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक ने भी निभाई सहभागिता
संवेदनशील झांकियों से दिया जल जीवन हरियाली का संदेश


सीवान. मानव श्रृंखला निर्माण के लिए सुबह 9 बजे से ही अधिकारियों-कर्मियों का जुटान गांधी मैदान में होने लगा. विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी बच्चों को लेकर अपने नियत स्थल पर पहुंचने लगे. गांधी मैदान में सबसे पहले गुब्बारा उड़ाकर जल जीवन हरियाली अभियान का शुभारंभ किया गया. सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों से मैदान भर चुका था. सुबह में तेज बर्फीली हवा चलने के कारण सभी लोगों को परेशानी हो रही थी लेकिन अभियान में किसी तरह का विलंब नहीं हुआ. मौसम को मात देते हुए विभिन्न झांकियों में शामिल होने वाले कलाकर तैयार थे.जल-हरियाली खत्म होने के बाद जीवन कैसा होगा इसे लेकर निकाली गई झांकी संवेदनशीलता को झकझोरने वाली थी. इस झांकी में एक साथ कई मैय्यत मंजिलें सजी हुई जा रही थीं आगे आगे एक आदमी मिट्टी का खाली घड़ा टांगे चल रहा था जो कि हमारी संस्कृति में अंतिम संस्कार के दौरान किए जाने वाले कर्मकांडों का मुख्य भाग होता है. यह लोगों में चेतना फैलाने के लिए निकाली गई थी ताकि लोग समझें कि पानी नहीं रहने पर हमारे समाज को ऐसे ही दिन देखने पड़ेंगे? मास्क लगाए, पौधा कंधे पर रखकर चलते लोग
जल जीवन हरियाली की इस झांकी का संदेश भी संवेदनशील था. यह झांकी बता रही थी कि आने वाले दिनों में जब पृथ्वी से जल खत्म हो जाएगा तो पौधे भी खत्म हो जाएंगे. हम ऑक्सीजन पाने के लिए अपने कंधे पर एक बोन्साई पौधा रखकर चलेंगे और मुंह में मास्क लगा होगा. यह झांकी संदेश दे रही थी कि अगर हम आज नहीं चेते तो संभव है कि हमारे मुंह में मास्क ही लगा होगा और कंधे पर ऑक्सीजन पाने के लिए अपना-अपना स्त्रोत ढूंढ़ना होगा. यह दिन नहीं देखना पड़े इसी उद्देश्य को लेकर यह मानव श्रृंखला बनाई गई है. इस श्रृंखला का उद्देश्य हाथ में हाथ रखकर खड़े होना नहीं बल्कि मिल जुलकर जल और हरियाली बचाने के लिए है ताकि भविष्य में जीवन और हरियाली बचाई जा सके और हमारी आने वाली पीढ़ी को स्व्च्छ जल और साफ हवा नसीब हो सके.