
छठ पूजा को लेकर बांस की टोकरी की मांग को लेकर बांस के शिल्पकारों ने गांव में घर-घर कर रहे हैं निर्माण
▶️टेहटी व चंदा गांव के कारीगर मांग को लेकर करते हैं निर्माण
▶️लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा में बांस की बनी टोकरी और सुपली का होता है उपयोग▶️टेहटी और चंदा गांव में दूरदराज मुजफ्फरपुर, पटना, सिवान आदि जगहों से खरीदारी के लिये आ रहे है ब्यवसाई
मढ़ौरा(मनोकामना सिंह)/सारण. स्थानीय प्रखंड के टेहटी और चंदा गांव में कारीगरों द्वारा निर्मित बांस की टोकरी की दिनो दिन मांग बढ़ती जा रही है.अब तो छठ पूजा में यहां की निर्मित टोकरी मुजफ्फरपुर, पटना ,सिवान आदि शहरों के ब्यवसाई खरीदारी के लिए पूर्व से ऑर्डर देकर बनवा रहे है. इसलिए स्थानीय कारीगरों ने टोकरी का निर्माण घर-घर कर कुटीर उद्योग के रूप में विकसित कर रहे है और अपनी निर्माण टोकरी की बिक्री कर सालाना आमदनी में इजाफा कर रहे हैं. है,जिससे दीपावली और छठ पर्व ने उनके लिए खुशिया लेकर आता है.पहले भी इस क्षेत्र में टेहटी,चंदा और प्रखंड के कुछ अन्य गांव में भी बांस की टोकरी बनती थी, लेकिन उसकी बिक्री जिले के अंतर्गत आसपास के शहर छपरा ,मढ़ौरा में ज्यादातर स्थानीय ब्यापारी खरीदारी कर बेचते थे. जिससे कारीगरों को ऊंचे दाम नहीं मिल पाते थे. अब दूर दराज के ब्यवसाईयों के आने से टोकरी की कीमतें बढ़ी है और लागत के अनुपात में मुनाफा लेकर बेची जा रही है. इस वर्ष टोकरी की कीमत ₹150/- तक पहुंच चुकी है. स्थानीय कारीगरों का कहना है कि छठ के पहले दो तीन महीनों तक टोकरी निर्माण से रोजगार सृजन हो जा रहे हैं. फिर छठ पूजा के बाद सभी कारीगर चिमनी पर ईंट निर्माण में लग जाते हैं. फिर जब बरसात शुरू हो जाते हैं तो ईंट भाठा पर काम बंद हो जाता है तो हमलोग टोकरी निर्माण कर अब स्वरोजगार कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. इससे त्योहारों में खुशियां रह रही है.दूरदराज के ब्यवसाई अग्रिम भुगतान कर दे रहे हैं, जिससे हमलोगों को बांस की खरीदारी में भी सहूलियत हो रही है और निर्मित टोकरी की बिक्री की गारंटी भी हो जा रही है.वही बांस की सुपली निर्माण मढ़ौरा नगर के हरबरनाथ मंदिर के पीछे दलित बस्ती में किया जाता है. जहां लगभग सालों भर बांस की निर्मित सुपली, डाला,मौनी आदि कई तरह के निर्माण समान शुभ मुहूर्तों से लेकर तीज त्योहारों में उपयोग होते रहते हैं. यहा भी इस छठ पूजा में सुपली निर्माण में काफी संख्या में पुरुष के साथ ही महिलाएं भी लगी रहती है. मुख्य बाजार के समीप रहने से इनके द्वारा निर्मित समान नजदीकी बाजार में ही बिक जाते हैं.




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