असहायों,जरूरतमंदों और निर्बलों की सहायता से बढ़कर को धर्म नहीं-राधिका दासी जी

मांझी(सारण)
मानव का सबसे बड़ा धर्म है कि वह असहायों,जरूरतमंदों और निर्बलों की सहायता करे।भूखे को खाना और प्यासे को पानी दे।इससे बड़ा कोई धर्म नही होता।वहीं अपने स्वार्थ व अहंकार में आकर ऐसे लोगों को कष्ट देने से बड़ा कोई पाप नही होता।यह बातें ताजपुर-फुलवरिया में चल रहे श्रीमद्भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ के दौरान बुधवार की शाम प्रवचन करती हुई नेपाल की असहाय व उपेक्षित लोगों के लिए समर्पित संस्था माया घर की अध्यक्षा राधिका दासी जी ने कही।उन्होंने आगे कहा कि परोपकार से बड़ा कोई पूण्य नही होता।सभी अठारह पुराणों का यही सार है।वहीं भागवत कथा सुनाते हुए नवल बिहारी शरण जी महाराज ने कहा कि भजन के साथ प्रभु को समर्पित कर शुरू किया गया हर काम हमेशा पूर्ण होता है।भजन करना केवल बुढ़ापे का नही युवावस्था का भी काम है।सुख और दुःख दोनों ही परिस्थिति में ईश्वर को नही भूलना चाहिए।