अनेकता में एकता देखनी हो तो भगवान शंकर की परिवार से सीख लेना चाहिए – अखिलेश किशोरी जी

परवेज अख्तर/सिवान;

महाराजगंज(सिवान)(आससे)अनुमंडल मुख्यालय के दुर्गा चौक नखास पर नवनिर्मित काली मंदिर व मां दुर्गा की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा को लेकर आयोजित मां दुर्गा अंचल प्राण प्रतिष्ठा शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन देवी भागवत कथा, राम कथा का रसपान कराने के लिए श्री धाम वृंदावन से पधारी अखिलेश किशोरी जी ने कहा कि अनेकता में एकता देखनी हो तो भगवान शंकर के परिवार से सीख लेनी चाहिए। भगवान शंकर ही एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने कभी महल में नहीं रहे परंतु भगवान शंकर के शरण में रहने वाले को भवन नसीब अवश्य हुए, विघ्नहर्ता निर्माणकर्ता उन्हीं के पास थे अतः भगवान शंकर के परिवार से सीख लेने से आज कलयुग में आप सभी का परिवार धन्य हो सकता है। देवी भागवत कथा के दौरान अखिलेश किशोरी जी ने प्रवचन के दौरान कहा कि दुनिया में आकर सब कुछ जाना, खाना पीना,रहना,सोना,पूजा पाठ सब कुछ लेकिन मृत्यु के पश्चात हमारे नश्वर शरीर की आत्मा को ईश्वर के पास ही जाना है, तो उसी को नहीं जाना तो क्या जाना। इसलिए उसी को जानों वही सब कुछ दिया है और वही देगा भी। मानव जीवन में कष्ट निवारण, दुःखों का निराकरण भगवान के उस अनमोल अतुलनीय दृश्य का आनंद लेते रहे सारे कष्ट स्वत:छू मंतर हो जाते है।
वही राम कथा का वर्णन करते हुए अयोध्या से पधारे रामायणी वैष्णवी ने रविवार की संध्या राम जन्म उत्सव का वर्णन का रसपान कराते हुए उपस्थित श्रोताओं के समक्ष राम के अवतार की ऐसी वर्णन कर डाली की उपस्थित श्रोता कुछ पल के लिए मानों पत्थर के समान हो गए। वैष्णवी ने बताया कि राम जन्म की कथा श्रवण करना ही मुक्तिदायी है, उत्सवप्रिय है, मंगलकारी है, दुःख निवारण है। कथा श्रवण के दौरान हजारों की संख्या में महिला श्रोता व पुरुष श्रोता मौजूद थे मुख्य रूप से आयोजन समिति के रामबाबू प्रसाद,राजेश अनल, राजू गुप्ता, हरिशंकर आशीष, संजय सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नीरज कुमार, डेनीस कुमार, सूरज ठाकुर, संतोष कुमार, अनन्या उर्फ किट्टू आदि उपस्थित रह कथा श्रवण किया।