बेतिया :– सूर्य की पूजा व उपासना का यह महापर्व संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी 
ॐ घृणि सू

न्यूज़ इनपुट विजय कुमार शर्मा बगहा पश्चिमी चंपारण बिहार:– 
एहि एहि सूर्य: सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपय  मां भक्त्या  गृहाण अर्घ्य दिवाकरः।। नमो विश्वस्य ब्रह्म भास्वते विष्णु तेजसे ।जगत सावित्रे शुचये नमस्ते कर्मदायिने।। इन्हीं मंत्रों के उच्चारण के साथ सूर्य की पूजा व उपासना का यह महापर्व संपूर्ण विश्व के लिए कल्याणकारी है। चतुर दिवसीय यह सूर्य षष्ठी पर्व सूर्य उपासना का सबसे बड़ा प्रमाण है ।सूर्य की उपासना वैसे तो पूरे विश्व में होती है ।पर भारत के बिहार राज्य में छठ पर्व के नाम से सूर्य की जाने वाली उपासना का कोई जोड़ नहीं। आस्था, उपासना ,पवित्रता के इस महान पर्व में मानव जीवन की कोई ऐसी वस्तु नहीं होगी जिसका उपयोग नहीं होता है। चाहे वह गंना हो नींबू हो या फिर सिंघाड़ा इस पर्व में मानों प्रकृति की समस्त उपहारों  को बांस के बने सकवते में संवारने का अद्भुत कला दिखाई पड़ता है ।नहाए – खाए से शुरु होने वाला है यह पर्व जहां एक ओर नदी के किनारे संध्या अभिषेक शुरू होता है वही प्रातः  कालीन बेला मे दिए जाने वाले अर्घ्य के साथ   इसकी पूर्णाहुति होती है ।इस दिन नदी तट या यूं कहें बिहार के समस्त जलाशय जो जल रुपी अमृत देकर   जीव जंतु और पेड़ पौधों को जीवित रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका देते हैं कोसजा धजा कर पूरी तरह तैयार करते हैं। क्यों नहीं हम सभी इस परंपरा को अनवरत बनाए रखें ताकि हमें अपने प्रकृति के इन अंगों को जो जल के भंडार हैं स्वच्छ व साफ रहे। इन वादों और कस्मो के साथ मैं आपको इस चतुर दिवसीय छठ पूजा की बधाइयां देता हूं तथा आपका अभिनंदन करता हूं । आपका आशीर्वाद चाहता हूं और भगवान सूर्यदेव से प्रार्थना करता हूं कि हे  सूर्यदेव आप हम सभी प्राणियों को ऊर्जा प्रदान करें ।सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें ।आप सदैव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर करें ।इंहीं कामनाओं के साथ के  एक बार फिर सूर्य के इस मंत्र का ध्यान करते हुए ओम भूर भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात्। आपका निप्पू कुमार पाठक
 सचिव 
नैतिक जागरण मंच बगहा