सरस्वती नदी पूर्णोद्धार जन जागरूकता अभियान के आज अंतिम
ए.के.केशकर
 खागा 17 जून। जनपद के अंतिम ग्राम काशीदास पुर सरस्वती नदी प्रस्थान स्थल पर जल यात्रियों ने यात्रा को संपन्न किया अभियान को नदी के पुनर्जीवित हीने तके लगातार प्रयास जारी रखने हेतु संकल्प के लिए कुंडेश्वर महादेव मंदिर मझिलगावँ में समापन समारोह का आयोजन किया गया। इस जल यात्रा समापन समारोह की अध्यक्षा गंगावेश नारायणदास अर्जुना गंगा सरस्वती ने आयोजित किया गया । समापन समारोह अवसर पर अभियान के मार्गदर्शक स्वामी विज्ञानानंद जी ने कहा कि इन 5 दिनों में एक अलग तरह का अनुभव हुआ गांव गांव में चौपालों के माध्यम से जनसमर्थन मैं यह देख देखने को मिला की जल के संचयन हेतु 80% आबादी तैयार खड़ी है ।यहां तक की श्रमदान से भी वह अपने जलाशयों एवं सूखी पड़ी नदी को पुनर्जीवित करने हेतु तैयार हैं इससे यह साबित होता है कि वर्त्तमान समय में नदी एवं जल संरक्षण का महत्त्व समझ आ गया है।इसी क्रम में ससुर खरेदी सरस्वती नदी पुनरुद्धार अभियान के संयोजक राजेंद्र प्रसाद साहू ने पदयात्रियों एवं उपस्थित जन समुदाय को जल संरक्षण हेतु चार तरीकों हेतु शपथ दिलाकर कहा कि हमें अपने जल स्रोतों का अतिक्रमण होने से बचाना होगा । दूसरा जलस्रोतों में जल का संचयन हो, वर्षा जल व्यर्थ में ना बहने पाए।
तीसरा जल का अति दोहन ना हो ,जितनी आवश्यकता है उतना ही उपयोग किया जाए और चौथा यह कि जल को किसी भी रुप में प्रदूषित ना किया जाए यदि इन 4 तरीके हम अपने व्यावहारिक जीवन में अपना लें तो शायद  जल की कमी  नहीं होने पाएगी।  अपना ले शपथकहा कि हमें अपने जल स्रोतों पर चार स्तर पर काम करने करने की आवश्यकता है पहला यह कि जलाशयों में हो रहे अतिक्रमण को कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेवी प्रेमा सिंह राठौर ने कहा कि वर्तमान समय में जनपद को जल समृद्धि में संपन्न बनाने हेतु प्रत्येक जनपद वासी का यह धर्म बनता है कि जल की एक-एक बूंद को संचित करें और संचालित जल संचयन अभियानों मैं सहभागिता और योगदान दें जिससे एक जन आंदोलन के रूप में जल संचयन की प्रक्रिया चल पड़े । इसी क्रम में समाजसेवी धनंजय द्विवेदी ने कहा कि अभियान को हरसंभव सहयोग देने हेतु हम तैयार खड़े हैं । निश्चित ही स्वामी जी के निर्देशन में या अभियान सफल होगा हमारी ऐसी कामना है । इसी क्रम में स्वामी रमेश आनंद जी ने कहा की संत समागम जल संचयन पर हमेशा जोर देता रहा है और विभिन्न तरह के जल से जुड़े आंदोलन भी संतो ने किया है इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी सामाजिक और धार्मिक मुद्दों का हनन हुआ है तो संत समागम ही खड़े होकर के इन पर बदलाव हेतु काम किया है । यात्रा के समापन अवसर पर संस्कार टीम के अनिल वर्मा , आचार्य अखिलेश कुमार तिवारी, स्वामी कृष्णानंद , नेहरू युवा संगठन टीसी के रमेश चंद ने भी संबोधित किया।  अंत में जल पद यात्रियों ने कहा कि आज से हमारे इस कार्यक्रम का समापन नहीं बल्कि शुभारंभ हो रहा है। जो विभिन्न रूप में विभिन्न स्थानों पर हमारे यह पदयात्री सरस्वती नदी के पुनर्जीवित हेतु चर्चा करते रहेंगे , जन समर्थन बनाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर इस नदी पर श्रमदान करने के लिए भी तैयार रहेंगे कार्यक्रम के आयोजन में रत्नेश कुमार , कामता, ओम घाट के वैदिक विद्यालय के विद्यार्थी, संत राम, बलराम, रामधनी यादव,  रामसनेही पटेल ने सराहनीय भूमिका निभाई।