मां का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार
“स्तनपान की रक्षा की जिम्मेदारी आखिरकार है किसकी” की थीम” पर कार्यक्रम

मां के शरीर में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया:
पोषण क्षेत्र में रैली निकालकर माताओं व महिलाओं को किया गया जागरूक:
किशनगंज, 03 अगस्त।
शिशुओं को कुपोषण से बचाने और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जिले में रविवार से विश्व स्तनपान सप्ताह का शुभारंभ हुआ। इस दौरान जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में सोमवार को “स्तनपान की रक्षा की जिम्मेदारी आखिरकार है किसकी” की थीम पर विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया। मंगलवार को जिले आंगनबाड़ी केंद्रों के सम्बंधित पोषण क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से माताओं व महिलाओं को जागरूक किया गया। जहां एक ओर आमजनों को जागरूक करने के उद्देश्य से रैली निकाली गई। वहीं, सेविकाएं अपने पोषण क्षेत्र में घर घर जाकर माताओं को इसकी जानकारी दे रही हैं। सेविकाओं का ज्ञानवर्धन करने के लिए बैठक की गई। जिसमें उन्हें स्तनपान से जुड़ी शार्ट फ़िल्म दिखाई गई। साथ ही, विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। जिसमें बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव, शिशु मृत्यु दर में कमी, स्तनपान की सही स्थिति, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी, 6 माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान आदि मुद्दे शामिल रहे। बैठक के बाद सभी सेविकाओं को धात्री महिलाओं को अपने शिशुओं को स्तनपान के लिए प्रेरित करने और गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के महत्व व उद्देश्य की जानकारी देने का निर्देश दिया गया।

नियमित स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया से मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुना तक हो जाती हैं कम: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्री नंदन ने बताया विश्व स्तनपान सप्ताह को सफल बनाने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक के निर्देश के अनुसार जिले में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने एवं कुपोषण से शिशु को बचाने में स्तनपान के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने हेतु 04 अगस्त को कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने वाले नवजात शिशुओं में मृत्यु की संभावना 20 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसके साथ ही पहले छह महीने तक केवल स्तनपान करने वाले शिशुओं में डायरिया एवं निमोनिया से होने वाली मृत्यु की संभावना 11 से 15 गुना तक कम हो जाती है।

वीएचएसएनडी में दो वर्ष तक के बच्चों की माताओं को किया जाए निमंत्रित:
जिले के डी पी ओ मंजूर आलम ने बताया आशा, एएनएम एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान अधिक से अधिक माताओं को शिशु के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान प्रारंभ करने में मां की सहायता करना तथा गर्भवती, धात्री माताओं को छह माह तक केवल स्तनपान कराये जाने के महत्व को बताया जायेगा। आंगनबाड़ी सेविका एवं आशा द्वारा अगस्त माह में होने वाले वीएचएसएनडी में सभी दो वर्ष तक के बच्चों की माताओं को निमंत्रित किया जाएगा। साथ ही, उनके द्वारा बताई गई इनफैंट एंड यंग चाइल्ड फीडिंग के अभ्यासों तथा उनके बच्चों के पोषण स्तर में हुए सुधार के आधार पर चिह्नित माताओं की प्रशंसा की जाएगी।

मां के शरीर में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया:
कोचाधामन प्रखंड की सीडीपीओ नमिता घोष ने बताया, नवजात शिशु के लिए मां का पहला पीला गाढ़ा दूध कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है। जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए। सामान्यता बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक स्तनपान कराना चाहिए। शिशु को 6 महीने की अवस्था और 2 वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी देना चाहिए। मां के शरीर में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। जब तक बच्चा दूध पीता है, तब तक मां के शरीर में दूध पैदा होता है एवं बच्चे के दूध पीना छोड़ने के पश्चात कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है। उन्होंने बताया, मां का दूध जिन बच्चों को बचपन में पर्याप्त रूप से पीने को नहीं मिलता, उनमें बचपन में शुरू होने वाली मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। बुद्धि का विकास उन बच्चों में दूध पीने वाले बच्चों की अपेक्षाकृत कम होता है। अगर बच्चा समय से पूर्व जन्मा (प्रीमेच्योर) हो, तो उसे बड़ी आंत का गंभीर रोग, नेक्रोटाइजिंग एंटोरोकोलाइटिस हो सकता है। अगर गाय का दूध पीतल के बर्तन में उबाल कर दिया गया हो, तो उसे लिवर (यकृत) का रोग इंडियन चाइल्डहुड सिरोसिस हो सकता है। इसलिए मां का दूध छह-आठ महीने तक बच्चे के लिए श्रेष्ठ ही नहीं, जीवन रक्षक भी होता है।

स्तनपान से शिशु को होने वाले फायदे:

  • अच्छा और सम्पूर्ण आहार होता है मां का दूध
    -दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है
    -शिशु को रोगों से बचाता है
    -शिशु की वृद्धि अच्छे से होती है