•मांडलगढ़ राजस्थान उप चुनाव: भाजपा चुनाव समिति की बैठक जिले के बाहर, कांग्रेस की रणनीति, जोशी जी से आयेगी बहार
🌈💢 मांडलगढ़ [ दिलीप मेहता ].✍🏻मांडलगढ़ विधानसभा क्षैत्र में उप चुनाव को लेकर चुनावी रंगत कल से कांग्रेस के शंखनाद से शुरू होगी ? तो भाजपा अपनी रणनीति बनाने को लेकर भीलवाडा जिले के बाहर चितौडगढ़ जिले के मेनाल स्थित रिर्सोट में चुनाव संचालन कमेटी की बैठक कर रही है।
टक्कर कांटे की मानी जा रही है और यह डर अंदर ही अंदर भाजपा को भी है ? इसका प्रमाण भाजपा के जिलाध्यक्ष भाई दामोदर जी अग्रवाल है जो यह मान चुके है कि चुनावी फाईट ‘टफ ‘ है । समाचार पत्र में अग्रवाल जी की यह खबर प्रकाशित भी हुई थी ?
ऐसा जिलाध्यक्ष महोदय ने क्यों कहा यह समझ से परे है। गुजरात के चुनावो में भाजपा कडे संघर्ष में जुझते हुये भी यह कहती रही कि हम 150 सीटे जितेगे ? भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की इस टिप्पणी से भाजपा का जोश बरकरार रहा और कार्यकर्ताओं का मनोबल टुटा नहीं।
लेकिन यहां के उप चुनाव में जिलाध्यक्ष जी ने चुनाव ” टफ ” मान लिया तो फिर आगे कहने और समझने की जरूरत ही दिखाई नहीं दे रही है ? जनता जनार्दन की नजरो में इससे क्या समझा जायेगा और कार्यकर्ताओ का जोश किस तरफ होगा यह सोचनीय वाली बात है।
भाजपा के लिये सब कुछ जानने के बाद इस राज्य की मुखिया वसुंधरा राजे ने समझ लिया और यहां पर चुनावो के कुशल रणनीति कार प्रदेश के काबीना मंत्री श्रीचंद कृपलानी जी को मांडलगढ़ के उप चुनाव का प्रभारी बना दिया। अभी 2–3 दिन पूर्व जयपुर बुलाये गये क्षैत्र के नेताओ को इस बाबत समझा कर राजे ने संकेत दे दिया था ?
कृपलानी मजे हुये राजनीतिक खिलाडी है जो जानते है कि क्रिकेट रूपी इस चुनावी खेल में कौनसा बल्लेबाज किस नम्बर पर बल्लेबाजी करेगा और कौनसा बोलर तेज गेंदबाजी या गुगली फैंक कर सामने वाली टिम को आऊट करेगा ? इसी रणनीति के सहारे कृपलानी विधानसभा क्षैत्र में किस नेता को कहां लगा कर जिम्मेदारी की कबान देंगे और बुथ स्तर तक मजबूती लायेंगे तो चुनाव का मजा भी छलकेगा।
दुसरी और कांग्रेस के लिये यह उप चुनाव सी पी जोशी की रणनीति पर ही चलेगा और विवेक धाकड को टिकट जोशी के दम पर मिला है जो जग जाहिर है। जोशी जी से कांग्रेस में बहार जरूर आयेगी इसमें कोई संदेह नहीं है। इस उप चुनाव में खेल की तरह ही चुनाव लडने वाले दोनो मुख्य दलो के प्रत्याक्षी इस चुनाव मैदान में प्रचार प्रसार कर कितना पसीना बहायेंगे और टीम भावना से जीत का डंका बजायेंगे ,, यह सब कुछ 20 जनवरी के बाद ही गति पकडता दिखाई देगा।
अंदरूनी गुटबाजी के चलते अभी रणनीति व मान मनुहार का वक्त दोनो दलो में चलेगा फिर मिलनी — झुलनी होगी …. हाथ मिलेगे और दिल मिलेगा …तभी जाकर जोश की नई दिशा जाग्रत होगी और उसका असर चुनाव प्रचार से शुरू होकर चुनाव परिणाम तक जाकर समाप्त होगा।
फिलहाल यह 4–5 दिनो का वक्त बडे बडे नेताओ की मौजुदगी लिये फार्म भरने और आपस में गले लगाने और नाम उठाने वालो की मनुहार करने का ही रहेगा ? उसके बाद भी गुटबाजी रही तो फिर वोट देने तक कौन सा दल बार – बार पंचर होगा या नहीं होगा … इसका प्रमाण 1 फरवरी को साक्षी बनकर सामने खुद ही दिखाई देगा …. फिलहाल इस चुनावी माहौल में प्रशासन भी चुनाव को लेकर अमन , चैन व शांति की कामना करेगा तो खडे होने वाला प्रत्याक्षी अपनी जीत को लेकर दुआ मांगेगा ?? भगवान सबका भला करते करते …. इस उप चुनाव में किसका भला करेगा .. यह तो ,, बस … राम ही जाने ?? 🤷♀ 🤷🏼♂ जयहिन्द् 🇮🇳 🙏




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