
कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट-
बिहारशरीफ : 2 अक्टूबर 2020 : बिहारशरीफ के भैसासुर मोहल्ले स्थित साहित्यिक मंडली “शंखनाद” नालंदा के कार्यालय में कोरोनावायरस के चलते शारीरिक दूरी बनाते हुए महात्मा गांधी की 151 वीं तथा भारत के आदर्श राजनेता और भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 116 वीं जयंती मनायी गई। साथ ही साथ समारोह के दुसरे सत्र में साहित्यकारों, कवियों तथा समाजसेवियों के बीच मतदाता जागरुकता अभियान चलाया गया। इस जागरुकता अभियान में साहित्यकारों व समाजसेवियों के बीच परिचर्चा सह कविता पाठ का भी आयोजन किया गया, परिचर्चा का विषय “लोकतंत्र में वोट की ताक़त।” आसन्न विधानसभा चुनाव में जन समुदायों के साथ साहित्यकारों, कवियों, प्रबुद्धवर्गों तथा समाजसेवियों का भगीदारी पर विशेष चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यिक मंडली शंखनाद के अध्यक्ष प्रो. डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने तथा कार्यक्रम का संचालन शंखनाद के मीडिया प्रभारी राष्ट्रीय गजलकार नवनीत कृष्ण ने अपनी गजल “अब वों रानाइये ख़्याल कहाँ। जो रक़म कर सके नई तारीख़, आज वो साहिबे कमाल कहाँ। जो वतन पर निसार हो जाए, वो गाँधी-शास्त्री के जैसा लाल कहाँ। लाख दुश्मन करे यहाँ कोशिश, सत्य है हम तो हमको काल कहाँ। जो सियासत यहाँ पे करते हैं, देश द्रोही है देश पाल कहाँ — गाकर शुभारंभ किया।
समारोह के मुख्य अतिथि जिले में लगातार मतदाता जागरुकता अभियान चलाने वाले ज़िला स्वीप आईकॉन समाजसेवी आशुतोष कुमार मानव भी मौजूद रहे।
समारोह में कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए साहित्यिक मंडली शंखनाद के सचिव राकेश बिहारी शर्मा ने विस्तार से राष्ट्र निर्माता महात्मा गांधी तथा किसानों के ह्रदय सम्राट लालबहादुर शास्त्री जी के जीवनी, कृतित्व, विचार एवं आदर्शों से सबों को अवगत कराया।
उन्होंने कहा अभी देश कोरोनावायरस के संक्रमन काल से गुजर रहा है तो अभी इस समय मास्क ही वैक्सीन है।
उन्होंने कहा कि इस समयावधि में दोनों महापुरुषों के आदर्श का अनुसरण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने उपस्थित लोगों से महात्मा गांधी जी तथा शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके पदचिन्हों पर चलने का आवाह्न किया। श्रीशर्मा ने कहा महात्मा गांधी जी मात्रा हाड़-मांस के व्यक्ति ही नहीं थे, बल्कि वह संपूर्ण एक विचारात्मक आंदोलन थे। सामयिक दर्शन थे और दूरंदेशी युग पुरुष थे। महात्मा बुद्ध के बाद शांति के वे ऐसे मसीहा थे, जिन्होंने सत्य-अहिंसा के व्यापक महत्व को समझा और अपने में आत्मसात कर क्रियान्वित भी किया। जैसा वे कहते-करके भी दिखाते थे। शास्त्री जी को महापुरुषों, सुप्रसिद्ध विचारकों की पुस्तकें पढऩे का बड़ा शौक था। उन्होंने पुस्तकों को केवल पढ़ा ही नहीं, उनमें लिखे सद्गुणों को अपने जीवन में उतारा भी। उन्होंने इस पंक्ति को अपने जीवन में धारण किया- ‘मां और मातृभूमि का आदर न करना सबसे बड़ा गुनाह है।’ इस अवसर पर उनके चरित्र से हमें देश प्रेम, सत्य, अहिंसा और ईमानदारी की शिक्षा लेनी चाहिए।
श्रीशर्मा ने परिचर्चा के दौरान कहा कि हर वोट में देश व प्रदेश की तरक्की की ताकत होती है। हमारा एक वोट लोकतंत्र में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए वोट को व्यर्थ न जाने दें बल्कि जिस तरह बाप अपनी बेटी की शादी के लिए योग्य वर ढूंढने के लिए पूरी जांच पड़ताल करता है, ठीक उसी तरह मतदाता को भी चाहिए कि वोट देते समय भी प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी लें और योग्य व्यक्ति का चुनाव करें। मतदान हर व्यक्ति को करना चाहिए, क्योंकि हमारा वोट महत्वपूर्ण है। लेकिन ये भी ध्यान रखें कि हमारा वोट गलत व्यक्ति को न जाए और बिना किसी लोभ लालच में आए वोट करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यिक मंडली शंखनाद के अध्यक्ष प्रो. डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा लोकतंत्र में हमारा एक वोट कीमती है। लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए शासन है, लिहाजा सभी मतदाताओं को वोट जरूर करना चाहिए। साथ ही युवाओं को आगे आकर और लोगों को भी जागरुक करना होगा। लोकतंत्र का आधार ही वोट है, यदि हम वोट नहीं देंगे तो लोकतंत्र विफल हो जाएगा। इसके लिए हर मतदाता का अधिकार के साथ ये कर्तव्य भी है, वो वोट करे, ताकि अच्छी सरकार चुनकर आए।
परिचर्चा में नालंदा ज़िला स्वीप आईकॉन समाजसेवी आशुतोष कुमार मानव ने कहा युवा देश की रीढ़ है, लेकिन कई युवा वोट नहीं देते और महिलाएं भी मतदान के मामले में पीछे हैं। लेकिन युवा और महिलाओं को वोट के लिए आगे आना चाहिए क्योंकि वोट लोकतंत्र की ताकत है। उन्होंने कहा आज भी हमारे समाज में जागरुकता की कमी है और लोग मतदान के लिए आगे नहीं आते, जिससे मतदान का प्रतिशत कम रहता है। इसके लिए जागरुकता लाना जरूरी है और हर मतदाता वोट करे।
परिचर्चा के दौरान दीपक कुमार ने कहा लोकतंत्र में हमें मतदान का जो अधिकार मिला है, उसका हमें जरूर प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही हमें अन्य लोगों को जागरुक करना चाहिए, ताकि मतदान का प्रतिशत बढ़े और लोकतंत्र मजबूत हो।
मौके पर साहित्यकार व राष्ट्रीय शायर बेनाम गिलानी ने युवा मतदाताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि, लोकतंत्र के इस महापर्व में सभी को मतदान करना चाहिए। चुनाव में सभी के मतदान करने से जहां एक ओर स्वच्छ छवि वाली सरकार बनेगी, वहीं जिले का मतदान प्रतिशत भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा लोकतंत्र का आधार ही वोट है, यदि हम वोट नहीं देंगे तो लोकतंत्र विफल हो जाएगा। इसके लिए हर मतदाता का अधिकार के साथ ये कर्तव्य भी है, वो वोट करे, ताकि अच्छी सरकार चुनकर आए।
समाजसेवी चन्द्र उदय कुमार उर्फ मुन्ना पत्रकार ने कहा आज भी हमारे समाज में जागरुकता की कमी है और लोग मतदान के लिए आगे नहीं आते, जिससे मतदान का प्रतिशत कम रहता है। इसके लिए जागरुकता लाना जरूरी है और हर मतदाता वोट करे। तभी शसक्त राष्ट्र का निर्माण होगा।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी आशुतोष कुमार मानव के द्वारा मतदाता जागरूकता अभियान चलाया गया और सभी उपस्थित साहित्यकारों, साहित्यसेवियों व समजसेवियों को स्वच्छ मतदान करने के लिए शपथ दिलाया।
इस दौरान इतिहासकार तुफैल अहमद खाँ सूरी, सरदार वीर सिंह, कवयित्री प्रियारत्नम, शायर अमन कुमार, विजय कान्त सिन्हा, सरदार वीर सिंह, जितेंद्र कुमार, गणेश कुमार गुप्ता, आकाश राज, राज बल्लभ दास ने प्रमुखता से भाग लिया।




Recent Comments