छपरा: शहर का सारण संग्रहालय इन दिनों भोजपुरी लोकजीवन और संस्कृति के रंगों से पूरी तरह सराबोर है। पचमेल फाउंडेशन (छपरा) और आसरा सेवा केन्द्र (पटना) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय भोजपुरी चित्रकला कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को प्रदेश भर से आए कलाकारों ने अपनी तूलिका से लोक संस्कृति के विभिन्न रूपों को कैनवास पर जीवंत कर दिया।

कार्यशाला की मुख्य बातें:

  • लोककला के विविध रूप: कार्यशाला में करीब दो दर्जन महिला और पुरुष चित्रकारों ने भाग लिया। कलाकारों ने पीड़िया, गोधन, कोहबर, तुलसी चौरा और पारंपरिक भित्ति चित्रों के जरिए भोजपुरी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं को रंगों में ढाला।
  • सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का प्रयास: आयोजकों का कहना है कि तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच यह कार्यशाला भोजपुरी लोकजीवन की स्मृतियों को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक दस्तावेज तैयार करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
  • भाषा के साथ कला का प्रसार: पचमेल के निदेशक डॉ. पृथ्वीराज सिंह और डॉ. अमरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि एक तरफ जहां भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी तरफ चित्रकार इस लोककला को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में जुटे हैं।

सोमवार को होगी प्रदर्शनी और परिचर्चा

कार्यशाला के अंतिम दिन यानी सोमवार को कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्रों की भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस अवसर पर भोजपुरी चित्रकला के स्वरूप और विस्तार पर एक विशेष परिचर्चा का भी आयोजन होगा, जिसमें बिहार कला मंच के वीरेन्द्र सिंह, पद्मश्री श्याम शर्मा और बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक सिन्हा सहित कला एवं साहित्य जगत के कई दिग्गज अपने विचार रखेंगे।कार्यक्रम के समापन समारोह में महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल मुख्य अतिथि और छपरा विधायक छोटी कुमारी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।