
मशरक (सारण)
मशरक में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस समारोह के अवसर पर भोजपुरी मंडल मशरक के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वर्तमान में भोजपुरी भाषा आ साहित्य के दशा-दिशा पर परिचर्चा में आए विभिन्न संत महात्माओं, विद्वानों व साहित्यकारों द्वारा अपना अपना विचार ब्यक्त किए गये। मशरक स्टेशन फीडर रोड स्थित मंगल मार्केट के सभागार में चन्द्रकेत नारायण सिंह के अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संत विद्याभूषण जी कवि एवं सुफी संत डाॅ जौहर सफियाबादी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। मौके पर साहित्यकार शुभनारायण सिंह “शुभ”, प्रो नरेन्द्र कुमार तिवारी, अनुमंडल पत्रकार संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह, डाॅ पीके परमार, प्रो रविकांत “रवि”, दिलीप कुमार सिंह, रंजन कुमार सोनी के अलावे अन्य कई वक्ताओं ने वर्तमान भोजपुरी भाषा आ साहित्य के दशा-दिशा पर परिचर्चा पर अपना अपना विचार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि संत विद्याभूषण जी कवि ने कहा कि भोजपुरी भाषा के सिपाही देश के साधु संत लोग रहे, हम भी उस जमात के सिपाही है। भाई जौहर सफियाबादी का साथे हम भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में सामिल कराने को ले तन, मन आ धन से भी सामिल है। सुफी संत डाॅ जौहर सफियाबादी ने कहा कि भोजपुरी भाषा साहित्य के संविधान का आठवीं अनुसूची में सामिल कराने को ले हम अपना उम्र का सीमा से आगे बढ़के काम कर रहे है। अब हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। मौके पर एक प्रस्ताव पारित कर यह संकल्प लिया गया कि भोजपुरी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में सामिल कराने को ले सुप्रीमकोर्ट में याचिका दायर किया जाएगा। भोजपुरी भाषा के साथ सरकार सौतेलापन ब्यवहार कर रही है। जो करोड़ो भोजपुरी भाषाई के साथ अन्याय हो रहा है।




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