भ्रुण लिंग की जांच कर उसका परिणाम बताना गैरकानूनी-सीएमएचओ
गरीब बेटी को सुविधा सम्पन्न बनाने के लिए चिकित्सकों ने उठाया जिम्मा
आज़ाद नेब
भीलवाडा, 02 मई। जिले के पंजीकृत सरकारी एवं गैर सरकारी चिकित्सकों के साथ सीएचएचओ चैम्बर में मंगलवार को पीसीपीएनडीटी त्रौमासिक बैठक सीएमएचओ एवं जिला नोडल अधिकारी डॉ. जे.सी. जीनगर की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। बैठक के दौरान जिले में कन्या भू्रण हत्या जैसे जघन्य अपराधों को रोकने हेतु पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की गयी।
बैठक में सीएमएचओ ने भू्रण लिंग की जांच कर उसका परिणाम बताना गैरकानूनी बताया और कहा कि हमें बेटी बचाव के लिए आपसी समन्वय स्थापित कर कार्य करने के साथ साथ भू्रण लिंग जांच में लिप्त दलाल, चिकित्सक व परिजनों आदि को पकडवाने में प्रशासन की मदद करने का आह्वान चिकित्सकों से किया।
डॉ. जीनगर ने बताया कि अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार से भू्रण लिंग की जांच कर उसका परिणाम बताना गैरकानूनी है। फिर भी यदि कोई यह गैर कानूनी कार्य करता है तो उसके विरूद्ध सक्षम न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया जायेगा। जिसमें दोषसिद्व होने पर तीन से पांच वर्ष की कैद तथा 50 हजार से एक लाख रू. तक का जुर्माना हो सकता है। कानून के अन्तर्गत भू्रण लिंग की जांच करने वाले डॉक्टर तथा जांच कराने वाले व्यक्ति दोनों को समान कैद एवं जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जिनका पंजीकरण किया गया है उनके यहां प्रत्येक मरीज का फार्म-एफ भरा जाता है जिसकी एक प्रति सीएमएचओ कार्यालय पीसीपीएनडीटी सेल में प्रत्येक माह भिजवाया जाना आवश्यक है। जिन सेंटरों से यह सूचना नहीं आयेगी, उन सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। बैठक में सीएमएचओ ने भू्रण का लिंग परीक्षण हेतु दबाव बनाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध रेड अलर्ट बटन का इस्तेमाल करने के लिए चिकित्सकों को कहा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण सेंटर अपने यहां लाइसेंस की प्रति जहां पर अल्ट्रासाउंड किया जाता है, प्रदर्शन करेंगे तथा यहां लिंग भू्रण की जांच करना दंडनीय अपराध है, के बोर्ड का प्रदर्शन करेंगे।
बैठक के दौरान जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक रामस्वरूप सेन ने उपस्थित चिकित्सकों को मुखबिर योजना के तहत ढ़ाई लाख रूपये की राशि 104/108 टोल फ्री नम्बर का प्रदर्शन करने की जानकारी का व्यापक प्रचार प्रसार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि लिंग परीक्षण रोकने के लिए भारत सरकार द्वारा 1994 में यह अधिनियम बनाया गया जो पूरे देश में एक जनवरी 1996 से लागू है। इसके अन्तर्गत जांच करने वाले केन्द्रों, प्रयोगशालाओं व अल्ट्रासाउंड केन्द्रों को पंजीकरण कराना आवश्यक है।
बैठक में पीसीपीएनडीटी समन्वयक ने उपस्थित डॉक्टरों से कन्या भू्रण जांच एवं हत्या को रोकने हेतु सुझाव चाहे गये जिस पर उपस्थित डॉक्टर्स द्वारा सुझाव दिया गया कि अल्ट्रा साउण्ड सोसायटी ऑफ भीलवाडा की ओर से बेटी जन्म को उत्सव के रूप में मनाया जायेगा। इस हेतु गरीब बेटीयों/कच्ची बस्तियों में जन्म लेने वाली (0 से 6 वर्ष तक) बेटियों के लिए सोसायटी द्वारा फण्ड एकत्रित कर उन्हें आवश्यकतानुसार सुविधाऐं जैसे- कपडे, शूज, दवाईयां व खिलौने आदि उपलब्ध करवाये जायेगे।
बैठक में अति0 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुस्ताक खान, डॉ. अरूण चौहान, डॉ. अरविन्द गुप्ता डॉ. सुभाष टेलर, डॉ. एमपी अग्रवाल, डॉ. महेश गर्ग, डॉ. राधेश्याम शर्मा, डॉ. बीएम भारद्वाज, डॉ. कैलाश काबरा, डॉ. गोपाल घाकड़, डॉ. डीएल कास्ट, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक अरूण वशिष्ठ, जिला आईईसी समन्वयक अशोक प्रजापत सहित डीईओ खालिद अंसारी मौजूद थे।




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