
संजीत कुमार/सोनपुर/छपरा। सारण जिले में पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही गांव से लेकर शहर तक पितरों के प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक चलने वाले इस विशेष काल में सनातन धर्मावलंबी अपने पूर्वजों की स्मृति में तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। सुबह से ही नदी घाटों, तालाबों और धार्मिक स्थलों पर लोगों का तांता लगा हुआ है।
आमी गंगातट पर उमड़ी भारी भीड़
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमी स्थित गंगातट पर पितृपक्ष के दौरान तर्पण करने का विशेष महत्व है। यहां आसपास के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गंगा स्नान के बाद विधि-विधान से जल, तिल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर रहे हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
क्या कहते हैं धर्म गुरु और आचार्य?
- आचार्य राजेश कुमार तिवारी: शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से उनका आशीर्वाद मिलता है। इससे जीवन में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा पितृदोष का प्रभाव भी कम होता है।
- आमी मंदिर के पुजारी लक्ष्मीश्वर तिवारी: ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर अपने परिजनों के बीच आते हैं और उनके द्वारा किए गए श्राद्ध एवं तर्पण से तृप्त व संतुष्ट होते हैं।
तिथि ज्ञात न हो तो इस दिन करें तर्पण
स्थानीय नागरिकों (चंदन बैठा, रामसागर राम, रमेश यादव, संतोष सिंह, सुरेश तिवारी, अभिनव मिश्र, शिकंजा सिंह, सुनील महतो, शिव साह, भुवन प्रसाद और शशिरंजन सिंह) का कहना है कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की यह परंपरा सदियों पुरानी है। जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, वे अमावस्या के दिन विधिपूर्वक तर्पण कर सकते हैं।




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