नालन्दा : घटिया भोजन से नाराज छात्र उतरे सड़क पर
#एनएच 20 पर लेटे बच्चे, तीन घंटे वाहनों की आवाजाही रही ठप-
#अंबेदकर विद्यालय को प्लस टू में अपग्रेड करने व स्कूल कैम्पस में बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने की उठायी मांग-
#शिक्षकों को बनाया बंधक, विद्यालय प्रशासन पर लगाया अनियमितता का आरोप-
#छात्रों ने कहा-नहीं सुनते हैं शिक्षक न शिकायत निवारण करते हैं अधिकारी-
#जाम छुड़ाने में अधिकारियों को छूटा पसीना
एक हफ्ते में समस्याओं के निपटारे के आश्वासन के बाद माने बच्चे-
#जाम: घटिया भोजन से नाराज हरनौत प्रखंड के मुढ़ारी गांव के पास बुधवार को एनएच 20 को जाम करते अंबेदकर स्कूल के छात्र।

#कुमुद रंजन सिंह/नालन्दा : घटिया भोजन से नाराज अम्बेदकर स्कूल के छात्रों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। दर्जनों छात्र एनएच 20 पर लेट गये, सैकड़ों छात्र सड़क पर शिक्षक व प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। घटिया भोजन कमें सुधार के अलावा स्कूल को प्लस टू में अपग्रेड करने व कैम्पस में बाबा साहेब भीम राव अ्म्बेदकर की प्रतिमा लगाने की मांग कर रहे थे। इतना से भी छात्रों का मन न भरा तो शिक्षकों को स्कूल के कमरों में भी घंटों बंधक बनाये रखा।
विद्यालय प्रशासन पर अनियमितता का भी आरोप लगा रहे थे। छात्रों का कहना था कि शिक्षक के साथ ही अधिकारी भी उनकी शिकायतों का निपटारा नहीं करते हैं। जाम हटाने के लिए एसडीओ, बीडीओ समेत कई थानों की पुलिस वहां पहुंची। लेकिन, बच्चे आलाधिकारी को बुलाकर समस्याओं के निपटारे का ठोस आश्वासन चाह रहे थे। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के अथक प्रयास के बाद भी छात्र अडिग रहे। आखिरकार, बीडीओ मनीषा कुमारी ने एक हफ्ते में समस्याओं के निपटारे का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम हटाया गया।
दशम वर्ग के विजय कुमार, अंकित कुमार, रोहित कुमार समेत दर्जनों छात्र काफी उत्तेजित थे। हाथों में तख्तियां लिए आक्रोश प्रकट कर रहे थे। छात्रों का कहना था कि स्कूल में घोर अनियमितता बरती जा रही है। खाना, पोशाक, पढ़ाई की स्थिति ठीक नहीं है। थाली की भी कमी है। इसके चलते एक थाली में कई बच्चे साथ खाते हैं। 400 छात्रों के लिए महज एक चापाकल है। खेल का मैदान नहीं है।
छात्र सुजीत, राजीव, गौतम, सोल्जर, अमित, सुमित व अन्य ने बताया कि एक तो घटिया खाना वह भी समय पर नहीं दिया जाता है। खाना में कोई स्वाद नहीं होता है। किसी को पेट भरता है तो किसी का पेट खाली रह जाता है। रोटियां बेलनी पड़ती है। राकेश, रोहित, संजीव ने बताया कि दसवीं तक पढ़ाई की व्यवस्था है। इसके चलते मैट्रिक पास होने के बाद घरों में जाकर बैठना पड़ता है। कंप्यूटर लैब है। लेकिन पढ़ाई नहीं होती। लैब में बारिश का पानी टपकता है।