परवेज अख्तर/सिवान;
बड़हरिया. देश व दुनिया में अमन के लिए दुआएं मांगने के साथ ही प्रखंड के छक्काटोला में आयोजित तीन दिवसीय इजतमा रविवार को संपन्न हो गया. इस मौके पर हजारों अकीदतमंदों ने एक घंटे तक लोगों की भलाई, तंदुरुस्ती व देश-दुनिया में अमन व भाईचारे के लिए दुआएं मांगीं. इसी के साथ दीन व ईमान की बातें सिखने के लिए सैकड़ों जमातें अल्लाह की राह में निकल गयीं. इनमें कुछ जमातें 40 दिनों के लिए तो कुछ जमातें चार माह के लिए निकली हैं. वहीं शनिवार की रात में इस्लाम की रोशनी में इस्लामिक जानकर वक्ताओं ने मस्जिदों को आबाद करने की बातें कहीं. उन्होंने कहा कि अखलाक की बुलंदियों से अपनी पहचान कायम करें. तामिल पर जोर देते हुए वक्ताओं ने घर-घर में शिक्षा का अलख जगाने व अल्लाह व उसके बंदों को समझने की बात कहीं. वक्ताओं ने कहा कि रिश्तेदारों व पड़ोसियों के हक की अदायगी करें व रिश्ते को अहमियत को समझे.इस्लाम अपने हक की कुर्बानी देकर भी दूसरे के हक अदा करने की सीख देता है. वक्ताओं ने कहा कि अल्लाह ने अपने सभी बंदों को एक जैसा बनाया है. इसलिए हमें दूसरों को हकीर नहीं समझना चाहिए. भूलकर भी गरुर नहीं पालना चाहिए. इससे खुदा को सख्त नफरत है. इजतमा के आयोजन पर प्रकाश डालते हुए एक इस्लामिक स्कॉलर ने बताया कि आदमी को इंसान बनाने की कवायद के तहत इस इजतमा का आयोजन हुआ है. यूं कहें कि यह अच्छा इंसान बनाने की यह फैक्टरी है. उन्होंने असलहे की जगह अच्छा इंसान आवश्यक है. अगर पूरी दुनिया में शांति व खुशहाली होगी, अमन-चैन होगा तो न पुलिस की जरुरत होगी व न मिलिट्री की. उन्होंने कहा कि इजतमा में अल्लाह व उनके रसूल के बताये रास्ते पर चलने-चलाने की ट्रेनिंग लेते-देते हैं. उन्होंने कहा कि इतने बड़े मजमे में किसी प्रकार की अफरातफरी नहीं होना इजतमा की पहचान है. उन्होंने कहा कि हम सारे अल्लाह की औलाद हैं व उनके बताये रास्ते पर हमें चलना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम अल्लाह व अल्लाह के रसूल से ताल्लुक पैदा करें. ये ताल्लुक सेवा से पैदा होगा. बहरहाल, एक किलोमीटर परिधि में फैले इजतमागाह में सीवान, गोपालगंज, छपरा, पूर्वी चंपारण व पश्मिमी चंपारण के साथ ही बर्मा(म्यांमार), मलेशिया, इंडोनेशिया, बंग्लादेश आदि से आये अकीदतमंदों ने अपने आचार-व्यवहार से अच्छा इंसान होने का साबूत पेश किया. करीब 50 हजार अकीदतमंदों के भोजन के लिए लगे स्टॉल व जमीन पर एक साथ पंगत में बैठकर खाते लोग आकर्षण का केंद्र व भाईचारगी का मिसाल बने. वहीं इजतमा की शुरुआत से ही ट्रैफिक की व्यवस्था संभाल रहे अनुशासित व संयमित युवा भी कहे-अनकहे कई संदेश दे गए. वैसे तो इजतमागाह के अंदर ही तमाम व्यवस्थाएं सुनिश्चित थीं. न आदेश और न गुहार.
—————–




Recent Comments