जिले के कई प्रखंडों में परिवार नियोजन पखवाड़ा की सफलता के लिए बैठक आयोजित  

  • स्वास्थ्य कर्मियों को दी गई परिवार नियोजन से संबंधित विशेष ट्रेनिंग

–  आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परिवार नियोजन के संसाधनों के बारे में महिलाओं से करें खुलकर बातें

मोतिहारी, 6 जुलाई। जिले के पकड़ीदयाल, ढाका, आदापुर समेत कई प्रखंडों में परिवार नियोजन पखवाड़ा की सफलता के लिए बैठक आयोजित की गई। मंगलवार को पकड़ीदयाल अनुमंडलीय अस्पताल के सभागार में प्रखंड विकास  पदाधिकारी मीनू कुमारी एवं उपाधीक्षक डॉ राजीव कुमार की   अध्यक्षता में परिवार नियोजन पखवाड़ा के सफल संचालन के लिए बैठक आयोजित हुई। बैठक में केयर प्रबंधक सतीश कुमार सिंह द्वारा सभी उपस्थित डॉक्टर, नर्स एवं सहभागी स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीटी के माध्यम से पूर्व एवं वर्तमान में प्रखंड में परिवार नियोजन की  स्थिति के बारे में जानकारी दी गयी। विदित है कि 11 जुलाई से 31 जुलाई तक परिवार नियोजन पखवाड़ा का आयोजन होना सुनिश्चित है। इसके लिए सभी को निदेश दिया गया कि पखवाड़ा के पहले ही लाभ लेने के लिए इच्छुक दंपत्तियों का सर्वे कर लाइन लिस्ट तैयार कर ली जाए एवं उनका लगातार फॉलोअप किया जाए, जिससे अधिक-से-अधिक संख्या में लाभ दिया जा सके।

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर  स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार नियोजन दंपति संपर्क पखवाड़ा  शुरू किया गया है। इसको लेकर पकड़ीदयाल अनुमंडलीय अस्पताल उपाधीक्षक डॉ राजीव कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में डॉक्टर, नर्स, आशा फैसिलिलेटर, पर्यवेक्षिकाओं को केयर इंडिया की तरफ से विशेष प्रशिक्षण परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी गई।

डॉ राजीव कुमार ने बताया कि बढ़ रही जनसंख्या का मुख्य कारण महिलाओं व परिवारों में अशिक्षा व परिवार नियोजन की जानकारी की कमी है। इस समस्या का एक मात्र निदान है जागरूकता।

  • परिवार नियोजन के बारे में जागरूकता जरूरी :
    परिवार नियोजन का अर्थ है यह तय करना कि आपके कितने बच्चे हों और कब हों ? अगर आप बच्चे पैदा करने के लिए थोड़ी प्रतीक्षा करना चाहते हैं तो अनेक उपलब्ध साधनों में से कोई एक साधन चुन सकते हैं। इन्हीं साधनों को परिवार नियोजन के साधन, बच्चों के जन्म के बीच अंतर रखने के साधन या गर्भ निरोधक साधन कहते हैं।
    गर्भधारण, प्रसव, तथा असुरक्षित गर्भपात की समस्याओं के कारण महिलाए मृत्यु की शिकार हो जाती है। इनमें अनके मौतों को परिवार नियोजन के द्वारा रोका जा सकता है। उदहारण के तौर पर, परिवार नियोजन गर्भ धारण के खतरों की रोकथाम कर सकता है जो कि निम्नलिखित हैं –
    18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों की प्रसव के दौरान मृत्यु की संभावना रहती है। क्योंकि उनका शरीर पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। उनको पैदा हुए बच्चों का भी पहले वर्ष में ही मृत्यु हो जाने की आशंका अधिक रहती है। गर्भधारण से अधिक आयु की महिलाओं को ज्यादा खतरा रहता है क्योंकि उन्हें प्राय: अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी होती हैं । अत्यधिक 4 या उससे अधिक बच्चे पैदा करने वाली महिला को प्रसव के पश्चात खून बहने व अन्य कारणों से मृत्यु का अधिक जोखिम होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सेविका सहायिकाओं द्वारा  महिलाओं को परिवार नियोजन के संसाधनों यथा कॉपर टी, कंडोम, गर्भ निरोधक गोलियां, सूई आदि की जानकारियों के साथ महिलाओं को अनचाहे गर्भावस्था से रोक के उपाय की जानकारी देने की आवश्यकता है।
    बैठक में उपाधीक्षक डॉ राजीव कुमार  कुमार, डॉ रीता चौधरी ,डॉ हामिद हुसैन, बाल विकास  परियोजना पदाधिकारी रेखा कुमारी , प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक अनिल मण्डल कुमार, केअर प्रबंधक सतीश कुमार , प्रखंड मूल्यांकन सहायक आशिक हुसैन. ओमप्रकाश अरुण, आशा फेसि लिटि लेटर संजू कुमारी, जीविका के बीपीएम तथा प्रखंड के सभी विकासमित्र एवं उपस्थित थे।