
छपरा: बिहार में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के खिलाफ शुक्रवार को गंगा सिंह कॉलेज के शिक्षकों ने परिसर में जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने इन नए प्रावधानों को उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए गंभीर खतरा बताया है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में ऐसा कोई बदलाव नहीं होना चाहिए जिससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अकादमिक और प्रशासनिक अधिकार प्रभावित हों। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले शिक्षक समुदाय, शिक्षाविदों और कॉलेज प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
प्रमुख मांगें और चिंताएं
- स्वायत्तता की रक्षा: शिक्षकों ने कहा कि यह आंदोलन उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों के अधिकारों और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है।
- व्यापक चर्चा: सरकार से यह अपील की गई कि सभी संबंधित पक्षों की राय लेने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए।
- प्रमुख आपत्तियां: प्रस्तावित कानून के तहत कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से अलग करने और प्रशासन में अत्यधिक केंद्रीकरण किए जाने का विरोध किया जा रहा है।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका लोकतांत्रिक विरोध जारी रहेगा।

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प्रदर्शन में शामिल प्रमुख शिक्षक
इस विरोध-प्रदर्शन में राजीव कुमार गिरी, डॉ. संतोष कुमार सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह, नलिन रंजन, डॉ. पुनीत कुमार पांडेय, अभिषेक चतुर्वेदी, डॉ. हरि मोहन, डॉ. वशिष्ठ कुमार शर्मा, डॉ. रुद्र नारायण शर्मा, डॉ. नीलेश कुमार झा, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. अतुल शुक्ला, डॉ. राजेश माझी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. दिनेश कुमार यादव, प्रमोद कुमार, अभय कुमार सिंह और संजय कुमार समेत कई अन्य शिक्षक मौजूद रहे।




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