ख़तरा सर पे मंडरा रहा है, क्या इस्लामी दुनिया के पास अपने बचाव की कोई योजना है
खबरें देश विदेश ः अब्दुल मुत्तलिब रज़ा 
सुंदर इस्राईली लड़की हीफ़ा को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई कि वह इराक़ की अबू ग़ुरैब जेल के भीतर ख़तरनाक आतंकी संगठन दाइश के सरग़ना की भर्ती करे अतः वह अरब महिल के रूप में क़ैदी बनकर अबू ग़ुरैब जेल में पहुंची। वहीं से दाइश के गठन की साज़िश की प्रक्रिया तेज़ हो गई।
हीफ़ा ने जेल में अबु बक्र बग़दादी से मुलाक़ात की और दाइश के लिए उसे बहुत उपयुक्त व्यक्ति पाया और उसने इस्राईली जासूसी संस्था मोसाद को इस बारे में सूचित भी कर दिया। मोसाद हीफ़ा के सफल मिशन से बहुत ख़ुश हुई।
यह साज़िश आज इस सीमा तक पहुंच चुकी है कि लाखों बेगुनाह लोग मार जा चुके हैं सीरिया के भीतर 1 करोड़ 10 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। बस्तियां तबाह हो गई हैं। सीरिया में होने वाली तबाही का अनुमान एक हज़ार अरब डालर तक लगाया जा रहा है।
सबसे बड़ी बात यह हुई कि दाइश के रूप में इस्लाम के नाम पर एक बड़ा धब्बा लगा है, इस्लाम को हिंसक धर्म के रूप में बदनाम किया जा रहा है।
अमरीका ने दाइश से मुक़ाबले के नाम पर चालीस देशों का गठबंधन बनाया है जिसमें उसके पिट्ठू देश शामिल हैं। अमरीका ने इस गठबंधन की आड़ में जहां तक हो सकता था दाइश की आर्थिक और सामरिक मदद की है। जबकि दाइश के रूप में सामने आने वाली भयानक साज़िश का मुक़ाबला सीरिया और इराक़ के स्थानीय बलों ने किया और उसे कई मोर्चों पर पराजित किया। हलब आज़ाद हो गया तथा बहुत विस्तृत पैमाने पर इलाक़ों को दाइशी तत्वों से मुक्त करा लिया गया।
दाइश और अनुन्स्रह संगठनों तथा उनकी पीठ पर मौजूद अमरीका और इस्राईली जैसी ताक़तों से लोहा लेने में ईरान, रूस, सीरिया, इराक़, लेबनान और यमन सबसे आगे हैं। सभी इस्लामी देशों को चाहिए कि एकजुटता का प्रदर्शन करें और बाहरी शक्तियों की साज़िशों को विफल बनाएं।
इस समय अत्यंत संवेदनशील प्रश्न यही है कि इस भयानक साज़िश के मुक़ाबले में इस्लामी देशों को क्या करना चाहिए।इस खुले अत्याचार से निपटने के लिए इस्लामी दुनिया के पास क्या कार्यक्रम है।