केरल के बाढ़ मेंं मढ़ौरा के एक दर्जन युवक है घिरे, परिजन सकुशल घर वापसी की ताक रहे हैं राह
ロदैनिक खोज खबर के लिये मनोकामना सिंह की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :

मढ़ौरा (सारण) : स्थानीय नगर स्थित नट बस्ती के एक दर्जन युवा केरल मेंं आयी बाढ़ मेंं घिरे हैं.रोजगार के लिये गये युवकों मेंं सभी युवा मढ़ौरा नट टोली के बताये जाते हैं.केरल गये युवकों मेंं अमरेन्द्र नट का पुत्र बिक्की , स्व. नाथा नट का पुत्र विगु , विनोद नट का पुत्र पंकज , स्व. टीमल नट का पुत्र विजय , मिथिलेश औऱ उनिल, स्व. हरेंद्र नट का पुत्र नितेश , जगु नट का जमाई सूपन ,जगु नट का पुत्र रंजीत बताये जा रहे हैं.जो अगस्त महीने मेंं ही एक पखवारा पूर्व गये हैं.बाढ़ मेंं घिरे युवक केरल के त्रिसूर जिला के चावकाड मेंं शरण लिये हुये हैं.सभी युवा वर्ग के युवकों की उम्र 18 वर्ष से लेकर 28 वर्ष के बीच हैं.बाढ़ मेंं घिरे बिक्की के पिता अमरेन्द्र नट ने मीडिया को बताया की मेरा पुत्र से शनिवार को बात हुई हैं.बाढ़ से घिरे रहने से रोजी रोजगार नहीं हो पा रहा हैं. सरकारी मदद मेंं जी रहे हैं.पास के रुपये-पैसे खत्म हो चूके हैं। सरकार के फ्री रेल सेवा से आने के ताक मेंं हैं।बोला की वापसी के लिये रेल मेंं जगह मिलते ही घर वापस आ जाएंगे.

▶केरल के बाढ़ मेंं सारण के सैंकड़ों युवाओं का डूबा रोजगार, बांसुरी बेच करते हैं परिवार का गुजारा :

मढ़ौरा औऱ आसपास के सैंकड़ों बेरोजगार युवाओं के रोजगार को केरल मेंं आयी बाढ़ ने डूबो दिया.वहीं दर्जनो युवा बाढ़ से केरल मेंं घिरे है.बाढ़ मेंं घिरे युवा इसी मौसम मेंं केरल जाकर बांसुरी बेच परिवार का गुजारा करतें है। अभी हाल ही मेंं केरल गये युवक बाढ़ की तबाही मेंं घिरे है.वहीं सैंकड़ों युवा बाढ़ की खबर से अपनी यात्रा स्थगित किये हुये है.जबकी लगभग एक दर्जन बेरोजगार युवा केरल के त्रिसूर जिला के चावक्काड शहर मेंं पहुंच एक पखवारा से रूके हुये है.बाढ़ की तबाही से उनके रोजगार मेंं मंदी है.ये युवा वहां पर बांसुरी बेच अपना गुजारा के साथ-साथ परिवार के गुजारा के लिये भी कुछ रुपये बचा के भेजते रहते है.लेकिन बाढ़ से घिरे होने की खबर जैसे ही अन्य केरल जाने वाले युवाओं को लगे की अपनी पांव रोक तो लिया.लेकिन रोजगार के प्रभावित होने से चिंतित है.वहीं इनके रोजगार केरल मेंं फलने फूलने से यहां भी बांसुरी निर्माण मेंं लगे मजदूरों को मंदी झेलना पर रहा है.क्योंकि सारण जिले के ही मढ़ौरा प्रखंड के मिर्जापुर , पटेढा औऱ बनियापुर प्रखंड के पैगम्बरपुर मेंं बड़े पैमाने पर स्थानीय मजदूर बांसुरी बनाते थे.जिसकों ये बेरोजगार युवक केरल राज्य के कई शहरों मेंं ले जाकर बांसुरी बेचते थे।इस प्रकार से देखा जाए तो अप्रत्यक्ष रूप से केरल के बाढ़ मेंं सारण के सैंकड़ों परिवारों के रोजगार भी डूब गये.केरल मेंं रोजगार के तलाश मेंं प्रति वर्ष जाने वाले युवाओं मेंं पकहा , असोईयां,मिर्जापुर औऱ हसनपुरा गांव के युवा है. फिलहाल जो युवा केरल मेंं बाढ़ से घिरे है, वो मढ़ौरा नगर के नट बस्ती के निवासी है.जो हर साल अगस्त महीने मेंं जाते है औऱ केरल मेंं छः महीने तक रहकर बांसुरी बेच अपना भरण पोषण कर चालिस से पचास हजार रुपये बचा लेते है.जिससे घर पर परिवार का भी गुजारा चलता है.