एक दिवसीय कार्यशाला में चिकित्सकों को दी गयी मिजिल्स-रूबेला की जानकारी
⏺️ प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को दिया गया प्रशिक्षण
⏺️9 माह से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को एमआर का टीका लगना जरूरी

छपरा: शहर के छत्रधारी बाजार स्थित आईएमए भवन में एक मिजिल्स रूबेला सर्विलांस पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सारण प्रमंडल के क्षेत्रीय अपर स्वास्थ्य निदेशक(आरएडी) डॉ. अरविंद कुमार गुप्ता, सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा एवं आईएमए बिहार के अध्यक्ष डॉ. शालीग्राम विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया।

इस अवसर आरएडी डॉ. एके गुप्ता ने कहा खसरा एक जानलेवा व संक्रामक रोग है। यह बच्चों में गंभीर कुपोषण, दस्त, निमोनिया और दिमागी बुखार भी कर सकता है। बुखार, शरीर पर लाल दाने, नाक बहना, आंख आना आदि इस बीमारी के लक्षण हैं। गर्भवती महिला में रूबेला संक्रमण से अजन्मे बच्चे में जन्म दोष जैसे अंधापन, बहरापन, मंदबुद्धि और दिल में सुराख जैसी भयंकर बीमारी हो सकती है। इससे बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी है। बच्चो को 9 माह से 15 वर्ष की आयु के बच्चों को एमआर टीका लगना जरूरी है। उन्होने सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को खसरा-रूबेला का टीकाकरण शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया।
सभी की सहभागिता से मिलेगी सफलता: इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने कहा किसी भी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी कर्मियों का योगदान जरूरी है। उन्होने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करें। मिजिल्स-रूबेला का शत-प्रतिशत टीकाकरण करने के लिए समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत है। सिविल सर्जन ने कहा यहां जो प्रशिक्षण दिया जा रहा है वह ट्रेनर का ट्रेनिंग है। सभी लोग अपने यहां प्रखंडस्तरीय प्रशिक्षण शिविर में कर्मियों को मिजिल्स-रूबेला के बारे में प्रशिक्षण देंगे।

डब्ल्यूएचओ के सहयोग से बिमारियों पर हो रहा है वार:

आईएमए( इंडियन मेडिकल ऑफ एसोशिएशन) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शालीग्राम विश्वकर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ का बहुत बड़ा योगदान है। आज डब्ल्यूएचओ के सहयोग से हीं पूरे भारत से पोलियो जैसी गंभीर बिमारी को खत्म कर दिया गया है। ऐसे कई बिमारियों को डब्ल्यूएचओ के सहयोग से खत्म किया जायेगा।

फिल्ड विजिट कर करें मरीजों की पहचान: डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ. रंजितेष ने बताया जिले के पांच प्रखंडो में मीजिल्स एवं रूबेला का एक भी केस नहीं मिला है। मांझी, पानापुर, रिविलगंज, तरैया, लहलादपुर प्रखंड से एक भी केस नहीं मिला है। इन सभी प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि फिल्ड विजिट कर मरीजों पहचान करना सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि खसरा वायरस के लक्षण शहरी क्षेत्रों के मुकाबले कम सफाई वाले क्षेत्र जैसे झुग्गी झोपड़ी, असंगठित बस्तियों, कच्ची कालोनियों में फैलने की आशंका अधिक रहती है।

पीपीटी के माध्यम से दी गयी ट्रेनिंग: कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ के एसएमओ के द्वारा पीपीटी के माध्यम से सभी डॉक्टरों को मिजिल्स-रूबेला के बारे में ट्रेनिंग दी गयी। जिसमें बताया गया कि कैसे टीकाकरण करना है। उसकी रिपोर्ट कैसे तैयार करना है। एचएमआईएस पोर्टल डाटा अपलोड करने से पहले आंकड़ों सही तरीके जांच करने के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गयी।
इस अवसर पर जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. वीके चौधरी, यूनिसेफ के जिला समन्वयक आरती त्रिपाठी, जिला स्वास्थ्य समिति के डीएमएनई भानू शर्मा समेत अन्य चिकित्साकर्मी मौजूद थे। मंच का संचालन डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने किया।