2017 में जनता रही बे-हाल आ गया नया साल –लाल बिहारी लाल

8 नवंबरसे नोटबंदी की खुमारी में लोग डूबे ही थे कि धीरे-धीरे 2016 विदा हो गई और नुतनवर्ष 2017 का आगमन हो गया।जनता इससे अभी तक उबर नहीं पाई है।जबकि मोदी जी ने मात्र50 दिन मांगा था। और आज कई महीनें हो गये।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 7-9 जनवरी को बंगलुरु में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन पुर्तगाल के प्रधान मंत्री एंटोनियो कोस्टा के आतिथ्य में समपन्न हुआ। 5 राज्यो –उ.प्र.,पंजाब,उतराखंड,गोवा,मणिपुर में चुनाव हुए।जिसमें उ.प्र. मे सपा का सुफड़ा साफ हुआ वही योगी जी के नेतृत्व में भाजपा ने उ.प्र. मे सरकार बनाई,वही उत्तराखंड मे कांग्रेस ने सरकार खोईतो पंजाब में बनाई औऱ अकाली दल को बाहर का रास्ता वहां की जनता ने दिखा दिया। मणिपुर(28/70)में तथा गोवा (17/40) में कांग्रेस बड़े दल के रुप में उभड़ी पर भाजपा ने इन दोनों राज्यों में झपट कर सरकार बना ली।वही तामिलनाड़ू की सरकार शशिकला की वजह से काफी चर्चा मे रही।

1जुलाई से एक देश एक कर के नाम पर जी.एस.टीको चार स्लैबों 5,12,18 एवं 28% के साथ लागू किया गया जो काफीविवादित रहा। अंततः सरकार को बैक फूट पर आना पड़ा और सैकड़ो वस्तुओं का स्लैब इधरसे उधऱ करना पड़ा।इससे सिद्ध होता है कि बिना ग्रास रुट पर अभ्यास किये हीजी.एस.टी. को देश में लागू कर दिया गया।और इसमें भी शराब औऱ पैट्रोलियम के अलग रखागया अर्थात जनता के साथ ना-इंसाफी औऱ जनता को दोहरी मार झेलने के लिए छोड़ दियागया।

14 वे राष्ट्रपति के रुप मे बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का चयन हुआ तो वही 15वें उपराष्ट्रपतिके रुप में शहरी विकास मंत्री श्री एम.वेंकट्या नायडू का चयन हुआ। साल के अंत में हिमाचल तथा गुजरात में भाजपा की सरकार बनी हिमाचल मे कांग्रेस की हार हुई तो वहीभाजपा गुजरात बचाने में सफल रही।पहली बार हिमाचल मे वी.वी. पैट का उपयोग चुनावआयोग ने किया।

इस बार 104वीं राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस तिरुपति में आयोजित हुआ वही 2000 में विश्वसुंदरी प्रियंका चोपड़ा के बाद 2017 में हरियाणा की मानुषी छिल्लर बनी जो काफीसुखद रहा।वर्ष के शुरु से लेकर अंत तक कई राष्ट्राध्यक्षों का आना जाना लगा रहा। मलेशियाके प्रधानमंत्री हाजी मोहम्दनजीम बिन तुन अब्दूल रज्जाक मार्च के अंत में आये तोअप्रैल के पहले हफ्तें में बंगलादेश के राष्ट्रपति- शेख हसीना फिर आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रीमैल्कम टर्नबुल आये इसके उपरांत नेपाल के प्रधानमंत्री विद्या देवी भंडारी,श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंधे, साइप्रस के राष्ट्रपति निकोसअनास्तासियावेस तो अप्रैल के अंत में टर्कीके राष्ट्रपति रीसेप चैयब एंडोगन भारत की यात्रा पर आये थे जबकि मई के अंतिमसप्ताह में मारीशस के पी.एम. प्रविंद कुमार जगन्नाथ अगस्त के अंतम स्विटजरलैंड की राष्ट्रपति डोरिस लिउथर्ड तो सितंबर में बेलारुस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशैको तथा जपान के पी.एम. शिंजे आबे आये थे। इन सभी देशों से भारत द्वीपक्षीय समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया जिसमें टेकेलालाजी के आदान प्रदान के साथ-साथ रक्षा सौदा भी शामिल है।

वही भारत के पी.एम नरेन्द्र मोदी ने जुलाई मे श्रीलंका इजरायल,जर्मनी तो सितंबर में चीन एंव म्यनमार की यात्रा की। इन सभी देशोंसे द्विपक्षीय ब्यपार समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इसी के परिणाम स्वरुप विश्व बैंकद्वारा जारी ताजा आकड़ो में भारत इजी डूविंग देश की श्रेणी में 30 पायदान छलांग लगाकर 130 से 100वें स्थान पर आ गया है। रेलवे में स्पीड रेल की बात चली पर बनी नहीं। एक लग्जरी रेल मुम्बई एवं गोवा के बीच तेजस चलाई गई।कई एक्सप्रेस गाड़ियोंको सुपर फास्ट का दर्जा देकर यात्रियो को लूटने का इंतजाम किया गया पर मौलिक सुधार नही हुई इसलिए कई रेल हादसे भी हुए जिसमें सैकड़ो यात्रियों की जान माल की हानिहुई। जिससें रेल मंत्री सुरेश प्रभू को अपनी कुर्सी से इस खून के धब्बे को धोना पड़ा।रक्षा के क्षेत्र में अग्नि 4 का सफल परीक्षण हुआ तो वही इसरो ने एक साथ 104 उपग्रहो को छोड़कर फरवरी में एक इतिहास रच दिया।

कुल मिलाकर नोटबंदी से जनता अभी उभरी भी नहीं थी कि जुलाई में सरकार ने जी.एस.टी. ले आई जिससे देश की अर्थब्यवस्था पर तत्कालिन बुरा प्रभाव पड़ा। लघू उद्योग धंधे चौपट हुए।बेगरोजगारीबढ़ी फिर भी अदानी की सम्पति 120%मुकेश अंबानी की 74%, टाटा, प्रेम जी सहित सभी बड़े उद्योगपतियों की सम्पतिबढ़ी। मोदी सरकार 2014,2015एवं 2016 की तरह 2017 में भी कोई सार्वजनिक क्षेत्र मेंउद्योग नहीं लगा पाई। सभी राज्यों की भी स्थिति यही रही। परिणाम स्वरुप देश मेंबेरोजगारी बढ़ी है।मोदी जी ने देश में अच्छे दिन लाने के लिए औऱ भ्रष्टाचार मिटानेके लिए देशवासियों से 60 माह मांगा था पर आज 40 माह से उपर बीत जाने के बाद भी कोईअच्छें दिनों की किरण जनता को दिखाई नही दे रही है। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि इसका लांग टर्म में फायदा होगा पर मोदीजी का कोई भी काम जमिनी स्तर पर परिणाम के रुप मे अभी दिख नहीं रहा है।ताजा जारीजी.डी.पी. रिपोर्ट मे कहा गया है कि विकास दर 8% के बजाये 7.1% रहने की संभावना है। इससेजाहिर होता है कि विकास की रफ्तार सुधारवादी नितियों के बावयूद भी धीमी है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के मुखिया एंटोनियोगुट्रीस ने भी वर्ष 2017 को असफल कहा तथा उतरी कोरिया के तानाशाह किंग जांग केकारण विश्व में परमाणु खतरा मंडरा रहा है।इसलिए 2017 विश्व पटल पर शांति के मामले में कोई सराहनीय काम नही हो पाया।भारत और पाक केरिश्ते भी सुधर नही पाये पड़ोसी देश चीन से भी तानातनी रही। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि 2017 में जनता रही बे-हाल आ गया नया साल।सभी पाठको एवं देश वासियों कोहार्दिक बधाई।

लेखक-वरिष्ठसाहित्यकार एवं पत्रकार है।